home page

भारतीय न्याय संहिता के अनुरूप पश्चिम बंगाल को पूरी तरह समायोजित करने की प्रक्रिया शुरू

 | 
भारतीय न्याय संहिता के अनुरूप पश्चिम बंगाल को पूरी तरह समायोजित करने की प्रक्रिया शुरू


कोलकाता, 11 मई (हि. स.)। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के अनुरूप पश्चिम बंगाल को पूरी तरह समायोजित करने का निर्णय लिया गया है। सोमवार को नवान्न में आयोजित राज्य में भाजपा सरकार की पहली कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इसकी जानकारी दी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के अनुसार राज्य की प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं को ढालने की दिशा में काम शुरू किया जाएगा।

भारतीय न्याय संहिता देश का प्रमुख आपराधिक कानून है, जो एक जुलाई 2024 से लागू हुआ है। इस कानून ने औपनिवेशिक काल के 1860 के भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) का स्थान लिया है। नई संहिता का उद्देश्य न्याय व्यवस्था में आधुनिकता लाना और मामलों के निपटारे की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है।

हालांकि, पहले राजनीतिक मतभेदों के कारण राज्य सरकार की ओर से इस कानून को लागू करने में सहयोग नहीं मिलने का आरोप लगाया गया था।

गौरतलब है कि एक अगस्त 2024 को राज्य विधानसभा में तत्कालीन कानून मंत्री मलय घटक ने न्याय संहिता समेत तीन नए आपराधिक कानूनों के विरोध में प्रस्ताव पेश किया था। दो दिनों की चर्चा के बाद यह प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित हुआ था। उस समय विपक्षी विधायकों ने कहा था कि केंद्र द्वारा पारित कानून का राज्य विधानसभा में विरोध करना निरर्थक है। इसके बजाय राज्य में घुसपैठ और धर्मांतरण के खिलाफ कानून बनाने की मांग तत्कालीन विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने उठाई थी।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता