पार्षद अशोक रूद्र के बगावती तेवर से पार्टी को नुकसान हो सकता
आसनसोल, 20 मार्च (हि. स.)। तृणमूल कांग्रेस ने आसनसोल दक्षिण विधानसभा सीट से एक बार फिर तापस बनर्जी पर भरोसा जताते हुए उन्हें उम्मीदवार बनाया है। आसनसोल नगर निगम के वार्ड नंबर 78 के पार्षद अशोक रूद्र को इस बार आसनसोल दक्षिण विधानसभा सीट को लेकर अपनी दावेदारी साबित कर रहे थे। लेकिन पार्टी ने अंततः मौजूदा विधायक पर ही विश्वास कायम रखा। तृणमूल कांग्रेस आसनसोल दक्षिण विधानसभा सीट को लेकर काफी संजीदा है। पार्टी किसी भी प्रकार से जोखिम उठाने के मूड में नहीं थी।
इस फैसले के बाद अशोक रूद्र ने अपने सोशल मीडिया पेज पर एक विस्तृत संदेश जारी किया। उन्होंने पार्टी के निर्णय का सम्मान करते हुए कहा कि यह पार्टी का आंतरिक फैसला है, जिसे वे पूरी तरह स्वीकार करते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रारंभिक सूची में उनका नाम उम्मीदवार के तौर पर सबसे ऊपर था, लेकिन अंतिम समय में उसे हटा दिया गया।
अशोक रूद्र ने कहा कि वह पिछले 22 वर्षों से पार्टी के साथ जुड़े हुए हैं और हमेशा आम जनता, खासकर श्रमिकों और शिक्षकों के मुद्दों को उठाते रहे हैं। उन्होंने इस्को स्टील प्लांट (आइएसपी) में स्थानीय लोगों की नियुक्ति, बर्नपुर स्टील प्लांट के ठेका श्रमिकों को कम वेतन मिलने जैसे कई अहम मुद्दों पर आवाज बुलंद की है।
उन्होंने बताया कि करीब 22 साल पहले जब उन्होंने शिक्षकों के मुद्दे उठाए थे, तभी उनका परिचय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से हुआ था। उन्होंने ममता बनर्जी का आभार जताते हुए कहा कि समय-समय पर उन्हें पार्टी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं। नगर निगम चुनाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब उन्हें टिकट नहीं मिल रहा था, तब ममता बनर्जी के हस्तक्षेप के बाद ही उन्हें मौका मिला और वे चुनाव जीतने में सफल रहे। रूद्र ने कहा कि स्टील प्लांट के मजदूरों के हित में उन्होंने आंदोलन शुरू किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इन मुद्दों को उठाने के बाद पार्टी के ही एक मंत्री द्वारा उनके खिलाफ अदालत में मामला दर्ज कराया गया।
अपने व्यक्तिगत जीवन पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि उनकी नौकरी वाम मोर्चा सरकार के समय बनी पैनल के आधार पर 2009 में लगी थी, जबकि उनकी पत्नी को 2005 में नौकरी मिली थी। वर्तमान में वे एक स्कूल में प्रिंसिपल के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता परिवर्तन के बाद उन्होंने कभी अपने निजी लाभ के लिए कोई प्रयास नहीं किया।
अशोक रूद्र ने कहा कि पार्टी द्वारा किसी अन्य उम्मीदवार को टिकट दिए जाने से उनके समर्थकों में निराशा है। उन्होंने संकेत दिया कि वे जल्द ही अपने समर्थकों के साथ बैठक कर अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर फैसला लेंगे। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि श्रमिकों और शिक्षकों के हित में उनका आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।
इस घटनाक्रम के बाद आसनसोल दक्षिण की राजनीति में नई हलचल देखने को मिल रही है और आने वाले दिनों में स्थिति और दिलचस्प हो सकती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा

