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(संशोधित) धर्म जिसका, रक्षा की जिम्मेदारी भी उसी की : मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी

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(प्रथम लाइन में संशोधन के साथ पुनः जारी)

कोलकाता, 26 अक्टूबर (हि.स.)। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि धर्म जिसका हो, धर्म की रक्षा की जिम्मेदारी भी उसी की होती है।

सोमवार को मिलन मेला प्रांगण में आयोजित विजया मिलन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्ववर्ती सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, सिर्फ यह कहने से काम नहीं चलता कि 'धर्म जिसका भी हो, उत्सव सबका है।' बल्कि असल में यह कहना होगा कि 'धर्म जिसका है, उसकी रक्षा की जिम्मेदारी भी उसी की है।' यही बदलाव का नया पश्चिम बंगाल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार सभी समुदायों को उनके धार्मिक अनुष्ठान स्वतंत्रता और सुरक्षा के साथ मनाने का पूरा अवसर दे रही है।

राज्य की कानून-व्यवस्था में आए सकारात्मक बदलावों को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों के दौरान दुर्गा प्रतिमा के विसर्जन के लिए न केवल विशेष अनुमति लेनी पड़ती थी, बल्कि सड़कों के उपयोग करने पर भी पाबंदी होती थी। उन्होंने याद दिलाया कि उस दौरान अक्सर अशांति और अव्यवस्था की घटनाएं सामने आती थीं, लेकिन इस बार पूरा उत्सव और विसर्जन बिना किसी बाधा के पूरी शांति के साथ संपन्न हुआ।

मुख्यमंत्री ने कहा की इस बार पश्चिम बंगाल में करीब दुर्गा पूजा के 66 हज़ार आयोजन हुए लेकिन किसी भी आयोजक को पूजा की अनुमति के लिए ना तो कोर्ट कचहरी के चक्कर लगाने पड़े और ना ही कोई लड़ाई लड़नी पड़ी।

शुभेंदु अधिकारी ने इस साल के दुर्गा पूजा उत्सव को अब तक का सबसे शांतिपूर्ण उत्सव करार देते हुए आगामी त्योहारों को लेकर महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने बताया कि 28 अक्टूबर से ही राज्य में आने वाले सभी त्योहारों और पूजा-उत्सवों की सुरक्षा तैयारियों का काम युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया जाएगा। सरकार सुरक्षा व्यवस्था की एक नई और पुख्ता रूपरेखा तैयार कर रही है। सुरक्षा योजनाओं को अंतिम रूप देने के लिए राज्य प्रशासन तीन महीने बाद सभी पूजा समितियों के साथ दोबारा एक उच्चस्तरीय बैठक करेगा, ताकि भविष्य के सभी आयोजन पूरी तरह सुरक्षित और सुचारू रूप से संपन्न हो सकें।

(स्पष्टीकरण : इससे पहले जारी खबर की प्रथम लाइन में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का नाम भूलवश गलत चला गया था। इस अनिक्षाकृत त्रुटि के लिए खेद है। )

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष मधुप