home page

शिक्षक नहीं कर सकेंगे प्रत्यक्ष राजनीति - मुख्यमंत्री की ‘ऐतिहासिक’ घोषणा

 | 
शिक्षक नहीं कर सकेंगे प्रत्यक्ष राजनीति - मुख्यमंत्री की ‘ऐतिहासिक’ घोषणा


कोलकाता, 28 अक्टूबर (हि. स.)। शिक्षक भर्ती में अब एक नई 'शर्त' लागू कर दी गई है। नवनियुक्त शिक्षक अब प्रत्यक्ष राजनीति में हिस्सा नहीं ले सकेंगे और न ही किसी चुनाव में उम्मीदवार बन पाएंगे। यह फैसला केवल सरकारी स्कूलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकार द्वारा प्रायोजित (गवर्नमेंट-स्पॉन्सर्ड) और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों पर भी समान रूप से लागू होगा। बुधवार को राज्य सचिवालय नवान्न से प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस फैसले को 'ऐतिहासिक' करार दिया। साथ ही, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जो शिक्षक पहले से ही राजनीति से जुड़े हुए हैं, उनके भविष्य को लेकर सरकार का क्या रुख है।

राज्य कैबिनेट की बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। बुधवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु ने बताया कि भारत के किसी भी अन्य राज्य में शिक्षक सीधे तौर पर राजनीति से नहीं जुड़े होते हैं। अब तक पश्चिम बंगाल में कई शिक्षक प्रत्यक्ष रूप से राजनीति में सक्रिय रहे हैं, लेकिन अब नवनियुक्त शिक्षकों को यह अवसर नहीं मिलेगा।

ऐसे में सवाल उठता है कि पहले से राजनीति से जुड़े शिक्षकों का क्या होगा? इस पर शुभेंदु ने स्पष्ट किया कि उनके अधिकारों का हनन नहीं किया जाएगा। हालांकि, आज के बाद नियुक्त होने वाला कोई भी शिक्षक प्रत्यक्ष राजनीति या चुनावी राजनीति का हिस्सा नहीं बन सकेगा। वे नगर पालिका, नगर निगम, विधानसभा या लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।

बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में नवनियुक्त शिक्षकों के लिए इस नई शर्त को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दी गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस फैसले को स्कूल सर्विस कमीशन (एसएससी) की भर्ती प्रक्रिया में शामिल कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का स्तर सुधारने और उसकी गुणवत्ता वापस लाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने यह बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद से कुल 60 हजार नई भर्तियों को सरकार की ओर से मंजूरी दी जा चुकी है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / गंगा