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सीएलडब्ल्यू ने चित्तरंजन की खाली पड़ी जमीन पर अब होगी खेती

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सीएलडब्ल्यू ने चित्तरंजन की खाली पड़ी जमीन पर अब होगी खेती


पश्चिम बर्दवान, 15 सितंबर (हि. स.)। चित्तरंजन रेलनगरी में वर्षों से खाली पड़ी जमीन को अब कृषि कार्य में इस्तेमाल करने की पहल शुरू हुई है। इस सिलसिले में मंगलवार को चित्तरंजन लोकोमोटिव वर्क्स (सीएलडब्ल्यू) के डिप्टी जनरल मैनेजर ने इच्छुक व्यक्ति एवं संस्थाओं के साथ बैठक की।

मिली जानकारी के अनुसार, करीब 18 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली चित्तरंजन रेलनगरी का एक बड़ा हिस्सा लंबे समय से खाली पड़ा है। रेल कर्मचारियों की संख्या भी पहले की तुलना में काफी कम हो गई है, जिसके कारण शहर के कई इलाके लगभग वीरान होते जा रहे हैं। ऐसे में रेलवे की ‘ब्रह्म फूड्स’ नीति को ध्यान में रखते हुए चित्तरंजन रेलवे मेंस कांग्रेस की ओर से सीएलडब्ल्यू की अनुपयोगी जमीन को कृषि उत्पादन के लिए इस्तेमाल करने का सुझाव दिया गया था।

श्रमिक नेता इंद्रजीत सिंह के अनुसार, 18 अगस्त को महाप्रबंधक के साथ हुई बैठक में इस प्रस्ताव को रखा गया था। इसके बाद सीएलडब्ल्यू प्रबंधन ने इस दिशा में पहल शुरू की और मंगलवार को इच्छुक लोगों व संस्थाओं के साथ बैठक आयोजित की गई।

रेल सूत्रों के मुताबिक, चित्तरंजन में करीब चार हजार 534 एकड़ जमीन है। इनमें जो हिस्से फिलहाल खाली पड़े हैं, वहां अनाज, फल, दाल तथा औषधीय पौधों की खेती की संभावनाएं तलाशने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इस पहल के सफल होने से एक ओर जहां लंबे समय से अनुपयोगी पड़ी जमीन का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा, वहीं दूसरी ओर शहर में तेजी से बढ़ रहे झाड़-जंगल को भी नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। साथ ही स्थानीय लोगों को ताजी सब्जियां और फल उपलब्ध होने के अलावा खेती के माध्यम से रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

बताया गया कि इससे पहले भी चित्तरंजन में बड़े पैमाने पर आम के पौधे लगाए गए थे, लेकिन वर्तमान में उनमें से अधिकांश पौधों का अस्तित्व नहीं बचा है। ऐसे में रेल कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने मांग की है कि इस बार योजना को केवल कागजों तक सीमित न रखकर उसकी नियमित निगरानी और देखभाल सुनिश्चित की जाए।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा