बालू चोरी रोकने और वेतन समझौते की मांग को लेकर ईसीएल एरिया कार्यालय का घेराव, हड़ताल की चेतावनी
पश्चिम बर्दवान, 30 जून (हि. स.)। कोयला खदान श्रमिकों के वेतन समझौते को लागू करने, बालू चोरी पर रोक लगाने और खनन क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग को लेकर मंगलवार को आसनसोल के सोदपुर स्थित ईसीएल एरिया कार्यालय के समक्ष सीटू और सीएमएसआई की ओर से विरोध सभा और घेराव कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में सीपीएम केंद्रीय समिति की सदस्य मीनाक्षी मुखर्जी शामिल हुईं।
सभा में बताया गया कि ईसीएल के 14 क्षेत्रों में से अब तक छह क्षेत्रों में इस तरह के आंदोलन आयोजित किए जा चुके हैं। इन्हीं मांगों को लेकर 52 कोलियरियों में पिट मीटिंग कर प्रबंधन को ज्ञापन भी सौंपा गया था।
अपने संबोधन में मीनाक्षी मुखर्जी ने कहा कि कोयला श्रमिकों के लिए हर पांच वर्ष पर वेतन बोर्ड का गठन और वेतन समझौता लागू होना चाहिए, लेकिन तय समय सीमा बीतने के बाद भी प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। उन्होंने कहा कि इसी मांग को लेकर पूरे कोयला उद्योग क्षेत्र में लगातार आंदोलन चलाया जा रहा है।
उन्होंने कोयला उद्योग को बचाने, कोयला और बालू की चोरी रोकने तथा श्रम संहिता का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि इससे श्रमिक हितों और उद्योग दोनों को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसके खिलाफ आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।
सभा को संबोधित करते हुए सीटू समर्थित सीएमएसआई के महासचिव मनोज दत्ता ने खदान क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भूमिगत खदानों में नियमानुसार बालू भराई जरूरी है, लेकिन बालू चोरी के कारण यह कार्य प्रभावित हो रहा है। समय पर भराई नहीं होने पर धंसान की घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है, जिससे श्रमिकों और आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा प्रभावित होगी।
उन्होंने एनसीडब्ल्यूए-12 वेतन समझौते को लागू करने के लिए जल्द जेबीसीसीआई समिति गठित करने की मांग की और चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर कोयला श्रमिक व्यापक हड़ताल करेंगे।
सीटू नेतृत्व ने आंदोलन की आगामी रूपरेखा भी घोषित की।
बताया गया कि सितंबर तक समाधान नहीं होने पर सांकतोड़िया स्थित ईसीएल मुख्यालय में बड़ी रैली और सभा आयोजित की जाएगी। इसके बाद भी स्थिति नहीं बदलने पर रानीगंज से राजारहाट स्थित कोल इंडिया मुख्यालय तक पदयात्रा और बड़े आंदोलन की तैयारी की जाएगी।
सभा के अंत में श्रमिकों से संगठित होकर अपने अधिकारों और सुरक्षा के मुद्दों पर संघर्ष में शामिल होने की अपील की गई।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा

