चोरबागान हादसे की जांच 31 अक्टूबर से शुरू करेगा विशेष जांच दल
कोलकाता, 26 अक्टूबर (हि. स.)। चोरबागान हादसे की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने सोमवार को अपनी पहली बैठक की। महाकरण में करीब दो घंटे तक चली बैठक के बाद एसआईटी की प्रमुख और कलकत्ता उच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश अनिंदिता राय सरस्वती ने बताया कि आगामी 31 अक्टूबर, शनिवार से साक्ष्य और जानकारी जुटाने का काम शुरू किया जाएगा।
सोमवार की बैठक में चोरबागान पूजा समिति के कुछ पदाधिकारियों को बुलाया गया था। इसके अलावा कोलकाता पुलिस के कई वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में मौजूद थे। सूत्रों के अनुसार, बैठक में हादसे के कारणों और पूजा मंडप में श्रद्धालुओं के प्रवेश के लिए उपलब्ध रास्ते की चौड़ाई सहित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।
उल्लेखनीय है कि सप्तमी की शाम चोरबागान में भगदड़ और भीड़ के दबाव के कारण 19 लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले में पुलिस अब तक नौ लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस हादसे के लिए किसकी लापरवाही जिम्मेदार थी। कोलकाता पुलिस ने पहले ही घटना की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया है। राज्य सरकार ने घटना की जांच के लिए एक विशेष आयोग गठित करने की इच्छा जताई थी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी चाहते थे कि कलकत्ता उच्च न्यायालय के किसी वर्तमान न्यायाधीश के नेतृत्व में जांच समिति बनाई जाए। इस संबंध में राज्य के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी. घुगे को पत्र भेजा था। इसके जवाब में मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि जांच समिति का नेतृत्व किसी वर्तमान न्यायाधीश के बजाय सेवानिवृत्त न्यायाधीश को करना चाहिए। इसके बाद नवान्न की ओर से अधिसूचना जारी कर जांच समिति के गठन की जानकारी दी गई।
जांच समिति की मुख्य जिम्मेदारी हादसे के दिन हुई घटनाओं के कारणों का पता लगाना है। समिति को उस दिन की परिस्थितियों का विश्लेषण करने के लिए कहा गया है। उसे यह निर्धारित करना होगा कि भीड़ का दबाव पहली बार किस समय, किस स्थान पर और किस तरह बना था। इसके साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि संबंधित समय पर पूजा मंडप में निर्धारित क्षमता से अधिक लोग मौजूद थे या नहीं।
जांच के दायरे में यह पहलू भी शामिल है कि हादसे के पीछे मंडप के ढहने की घोषणा थी या बारिश के कारण स्थिति बिगड़ी थी। समिति भविष्य में इस तरह की दुर्घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक उपायों की सिफारिश भी करेगी। एसआईटी को तीन महीने के भीतर अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट सौंपनी होगी। हालांकि, सोमवार को समिति की प्रमुख ने अब तक हुई जांच की प्रगति के बारे में जानकारी देने से इनकार किया।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता

