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चोरबागान भगदड़ मामला : पुलिस ने पंडाल कलाकार सुशांत पाल को किया तलब, दर्ज हो रहे चश्मदीदों के बयान

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कोलकाता , 26 अक्टूबर (हि. स.)। चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भयावह भगदड़ की जांच तेज करते हुए कोलकाता पुलिस ने पंडाल कलाकार सुशांत शिबानी पाल को लालबाजार तलब किया है। इस हादसे में 19 लोगों की जान चली गई थी। पाल को बुधवार तक जांच अधिकारियों के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया गया है। उनसे पंडाल की संरचनात्मक योजना, डिजाइन और भीड़ की आवाजाही के लिए की गई व्यवस्थाओं को लेकर विस्तृत पूछताछ की जाएगी। पूछताछ के दौरान उनका आधिकारिक बयान भी दर्ज किया जाएगा।

इसके साथ ही, पुलिस ने घायलों और चश्मदीदों के विस्तृत बयान दर्ज करने के लिए घर-घर जाकर अभियान शुरू किया है। जांचकर्ता घटना के सही कारणों और परिचालन संबंधी खामियों का पता लगाने के लिए घटनाओं के क्रम को फिर से जोड़ने का बारीकी से प्रयास कर रहे हैं ताकि इस जानलेवा हादसे की जवाबदेही तय की जा सके। हालांकि इस मामले में सीसीटीवी फुटेज को एक अहम सबूत माना जा रहा है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक पंडाल और उसके आसपास लगे 32 कैमरों में से 16 कैमरों की फुटेज फिलहाल गायब या अनुपलब्ध है, जो जांच में एक बड़ी बाधा है।

विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रमुख और सेवानिवृत्त न्यायाधीश अनिंदिता रॉय सरस्वती द्वारा बीते गुरुवार को किए गए स्थल निरीक्षण के बाद, पूरे पंडाल को एक सक्रिय अपराध स्थल के रूप में संरक्षित करने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि ढांचा सील है, लेकिन प्रशासन ने प्रतिमा विसर्जन की अनुमति दे दी थी। मूर्ति को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए शुक्रवार को मुख्य द्वार का एक हिस्सा तोड़ा गया और शनिवार दोपहर को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में शांतिपूर्ण तरीके से विसर्जन संपन्न हुआ। इसके परिणामस्वरूप, महत्वपूर्ण फोरेंसिक सबूतों से किसी भी तरह की छेड़छाड़ को रोकने के लिए एसआईटी ने आयोजकों को उसी मंच पर पारंपरिक लक्ष्मी पूजा आयोजित करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया।

पुलिस इस घटना के सिलसिले में अब तक नौ लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें सार्वजनिक उद्घोषणा करने वाले दो अनाउंसर संजीव राहा (उर्फ सेंटू) और कुशल मजूमदार शामिल हैं। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने सप्तमी की शाम को अचानक माइक पर पंडाल के ढहने की घोषणा कर दी थी, जिससे वहां जानलेवा दहशत फैल गई। इस मामले में एक नया मोड़ तब आया जब मजूमदार ने दावा किया कि उसने एक अज्ञात पुलिस अधिकारी के विशेष निर्देश पर यह चेतावनी भरी घोषणा की थी।

एसआईटी ने अब घटनास्थल पर मौजूद कानून प्रवर्तन अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच के लिए अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि सप्तमी की शाम को चोरबागान में अस्सी से नब्बे पुलिसकर्मी तैनात थे, लेकिन अंदर भीड़ को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी निजी सुरक्षा गार्डों को सौंपी गई थी, जबकि पुलिस मुख्य रूप से बाहरी यातायात और भीड़ की आवाजाही का प्रबंधन कर रही थी।

जांचकर्ता अब ड्यूटी लॉग का सक्रिय रूप से सत्यापन कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि जब यह त्रासदी हुई, तब पुलिसकर्मी अपने निर्धारित ड्यूटी पर मौजूद थे या नहीं और क्या वे प्रभावी ढंग से अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / गंगा