चोरबागान हादसा : गिरफ्तार उद्घोषक की पत्नी का दावा, 27 तारीख से पहले थाने जाने से किया गया था मना
कोलकाता, 23 अक्टूबर (हि. स.)। कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिक दुर्गापूजा पंडाल में भगदड़ मामले में गिरफ्तार उद्घोषक बाबू उर्फ कुशल मजूमदार की पत्नी ने दावा किया है कि उनके पति पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करना चाहते थे, लेकिन किसी ने उन्हें 27 तारीख से पहले थाने जाने से मना किया था।
एक समाचार चैनल को दिए साक्षात्कार में बाबू की पत्नी ने बताया कि घटना के बाद उनके पति घर आए थे। इसके बाद कपड़े बदलकर मैदान की ओर चले गए, ताकि हादसे में फंसे लोगों की मदद कर सकें।
पत्नी के अनुसार, इसके बाद से वह घर नहीं लौटे। उन्होंने दावा किया कि उनके पति ने फोन पर उनसे कहा था कि वह थाने जाना चाहते हैं, लेकिन किसी ने उन्हें 27 तारीख से पहले पुलिस के पास नहीं जाने की सलाह दी थी। उन्होंने यह भी कहा था कि वह जल्द ही वापस आ जाएंगे। पत्नी ने बताया कि हादसे के बाद उनके पति हाफ पैंट, बिना आस्तीन की बनियान और गमछा लेकर घर से निकले थे। उन्होंने जूते भी नहीं पहने थे। इसके बाद वह कहां चले गए, इसकी जानकारी उन्हें नहीं थी। हालांकि, उस दौरान दोनों के बीच फोन पर संपर्क बना हुआ था। उनके पति ने उन्हें चिंता नहीं करने का भरोसा दिया था। पत्नी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनके पति को 27 तारीख से पहले थाने नहीं जाने की सलाह किसने दी थी।
गौरतलब है कि सप्तमी की शाम चोरबागान सार्वजनिक दुर्गापूजा पंडाल में मां दुर्गा के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। इसी दौरान बारिश के बीच माइक से कथित तौर पर यह घोषणा की गई कि पंडाल टूट रहा है। इस घोषणा के बाद वहां मौजूद लोगों में दहशत फैल गई और भगदड़ मच गई। इस दर्दनाक हादसे में कई नाबालिगों समेत कुल 19 लोगों की मौत हो गई। देखते ही देखते दुर्गापूजा का उत्सव मातम में बदल गया।
घटना के बाद से ही पुलिस माइक से घोषणा करने वाले लोगों की तलाश कर रही थी। गुरुवार को नदिया जिले से संजीव राहा उर्फ सेंटू को गिरफ्तार किया गया था। वह चोरबागान दुर्गापूजा समिति के कोषाध्यक्ष बताए जा रहे हैं। अब बाबू उर्फ कुशल मजूमदार की गिरफ्तारी के बाद पुलिस मामले की विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही है।
पत्नी के दावे के अनुसार, बाबू को 27 तारीख से पहले थाने जाने से किसने रोका था, यह भी जांच का महत्वपूर्ण विषय हो सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा

