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भाजपा छोड़ तृणमूल में शामिल हुए चंद्र बोस

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भाजपा छोड़ तृणमूल में शामिल हुए चंद्र बोस


कोलकाता, 12 अप्रैल (हि.स.)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र चंद्र बोस ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए। रविवार शाम को कोलकाता स्थित तृणमूल भवन में राज्य के मंत्री ब्रात्य बसु और सांसद कीर्ति आज़ाद की उपस्थिति में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस का ध्वज हाथ में लेकरकी सदस्यता ग्रहण की और ।

तृणमूल से जुड़ने के बाद चंद्र बोस ने कहा कि कुछ वर्ष पहले भाजपा से जुड़ना उनकी एक ऐतिहासिक भूल थी, जिसे उन्होंने अब सुधार लिया है। उन्होंने कहा कि कुछ साल पहले मैंने भाजपा से जुड़कर एक ऐतिहासिक भूल की थी। आज तृणमूल कांग्रेस से जुड़कर मैंने उस भूल का संशोधन कर लिया है।

उन्होंने कहा कि बंगाल की संस्कृति और धरोहर के साथ भाजपा का कोई मेल नहीं है। चंद्र बोस ने बताया कि एक समय वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों से प्रभावित थे। उन्हें लगता था कि देश की समस्याओं का समाधान खोजने और भारत को आगे बढ़ाने की उनकी क्षमता प्रभावशाली है।

लेकिन वर्ष 2016 में भाजपा से जुड़ने के बाद उन्हें यह अनुभव हुआ कि वहां कई लोग भारत के संविधान की भावना के विपरीत काम करते हैं। उन्होंने कहा कि उनका परिवार नेताजी सुभाष चंद्र बोस के विचारों पर चलता है, जिसमें सभी को साथ लेकर चलने और समावेशी सोच का विश्वास है।

चंद्र बोस ने कहा कि उन्होंने पहले ही अपनी चिंताएं पार्टी के सामने रखी थीं और उन्हें भरोसा भी दिलाया गया था कि ऐसी स्थिति नहीं बनेगी। उन्होंने यह भी बताया कि बंगाल के विकास के लिए उन्होंने केंद्र के सामने कई प्रस्ताव रखे थे, लेकिन उनमें से कोई भी आगे नहीं बढ़ पाया।।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा मूल रूप से हिंदू-मुस्लिम की राजनीति करती है और एक धर्म को दूसरे धर्म के विरुद्ध खड़ा करने की कोशिश करती है। इसी कारण उन्होंने भारतीय जनता पार्टी छोड़कर दोबारा तृणमूल कांग्रेस से जुड़ने का निर्णय लिया। अब वे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में बंगाल की संस्कृति, धरोहर और विकास के लिए काम करना चाहते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता