कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में शामिल हो सकते हैं चाणक्य नीति और वैदिक गणित
कोलकाता, 04 नवंबर (हि. स.)। पश्चिम बंगाल की उच्च शिक्षा व्यवस्था में प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विषयों को शामिल करने की तैयारी चल रही है। इसके तहत राज्य के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में चाणक्य नीति, प्राचीन गणित शास्त्र और वैदिक गणित जैसे विषयों को जगह मिल सकती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप राज्य सरकार की ओर से गठित टास्क फोर्स इस दिशा में काम कर रही है।
इस टास्क फोर्स का नेतृत्व प्रोफेसर एम. जगदीश कर रहे हैं, जो विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। समिति के प्रतिनिधियों ने इस संबंध में कई दौर की बैठकें की हैं। सूत्रों के अनुसार, बैठकों में भारतीय ज्ञान परंपरा (इंडियन नॉलेज सिस्टम) से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम में प्राथमिकता देने पर विचार किया गया है।
भारतीय ज्ञान परंपरा के अंतर्गत केंद्र सरकार की ओर से एक निर्धारित ढांचा तैयार किया गया है। इसी के तहत आईआईटी के विद्यार्थियों को भी भारतीय ज्ञान प्रणाली से जुड़े विषयों की जानकारी दी जा रही है।
टास्क फोर्स के सदस्य और कल्याणी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर कल्लोल पाल ने बताया कि भारतीय ज्ञान प्रणाली में चाणक्य के अर्थशास्त्र को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इसका गणित शास्त्र से भी गहरा संबंध है। टास्क फोर्स के दिशा-निर्देशों के अनुरूप उपयुक्त विषयों को उच्च शिक्षा में शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्राचीन गणित शास्त्र और चाणक्य नीति के लिए अलग से पाठ्यक्रम शुरू किया जा सकता है। इसके अलावा मौजूदा पाठ्यक्रम में नए विषयों के रूप में भी इन्हें शामिल करने का विकल्प है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय टास्क फोर्स ही लेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता

