केंद्रीय परियोजनाओं की बाधाएं दूर करने के लिए सचिवों को हर महीने दिल्ली जाने का निर्देश
कोलकाता, 29 अक्टूबर (हि. स.)। पश्चिम बंगाल में लंबित केंद्रीय परियोजनाओं के काम में तेजी लाने के लिए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने प्रशासनिक स्तर पर सक्रियता बढ़ाने का निर्देश दिया है। इसके तहत संबंधित विभागों के सचिवों को हर महीने कम से कम एक बार दिल्ली जाकर केंद्रीय मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक करनी होगी। आवश्यकता पड़ने पर उन्हें महीने में दो बार भी दिल्ली जाना पड़ सकता है। राज्य सरकार का जोर केवल नवान्न से पत्र या ई-मेल भेजकर जिम्मेदारी पूरी करने के बजाय सीधे बातचीत के माध्यम से परियोजनाओं की बाधाएं दूर करने पर है।
गुरूवार को राज्य प्रशासन सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल में कई केंद्रीय परियोजनाओं के क्रियान्वयन में विभिन्न समस्याएं आ रही हैं। कहीं धनराशि का आवंटन रुका हुआ है, तो कहीं स्वीकृति मिलने में देरी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जटिलताओं के कारण काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। प्रशासन के एक वर्ग का मानना है कि केवल केंद्र सरकार के खिलाफ शिकायत करते रहने से इन समस्याओं का समाधान नहीं होगा। केंद्रीय परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। इसी उद्देश्य से संबंधित विभागों के सचिवों को केंद्रीय मंत्रालयों के साथ सीधा संपर्क बढ़ाने का निर्देश दिया गया है।
निर्देश के अनुसार, जिन विभागों का केंद्रीय परियोजनाओं से सीधा संबंध है, उन विभागों के सचिवों को नियमित रूप से दिल्ली जाना होगा। वहां संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों के सचिवों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आमने-सामने बैठक कर परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करनी होगी। बैठकों में इस बात पर विस्तार से चर्चा की जाएगी कि काम किस स्तर पर रुका हुआ है, स्वीकृति मिलने में देरी क्यों हो रही है, धनराशि के आवंटन में क्या समस्याएं हैं और इन बाधाओं को जल्द से जल्द कैसे दूर किया जा सकता है।
राज्य प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, केंद्रीय परियोजनाओं के क्रियान्वयन या केंद्रीय संस्थानों से जुड़े प्रशासनिक कार्यों को केंद्र और राज्य के बीच समन्वय के बिना आगे बढ़ाना संभव नहीं है। केवल पत्र भेजकर या ई-मेल करके बैठने से समस्याओं का समाधान नहीं होगा। जरूरत पड़ने पर बार-बार संपर्क करना होगा, संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक करनी होगी और समस्याओं के समाधान के लिए सक्रिय पहल करनी होगी।
प्रशासनिक हलकों के अनुसार, लंबे समय से केंद्र और राज्य सरकार के बीच विभिन्न परियोजनाओं को लेकर खींचतान चल रही है। धनराशि के आवंटन, स्वीकृति और परियोजनाओं की शर्तों को पूरा करने के मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच कई बार मतभेद भी सामने आए हैं।
राज्य सरकार का आरोप है कि केंद्र की ओर से धनराशि या स्वीकृति मिलने में देरी के कारण कुछ परियोजनाओं का काम प्रभावित हो रहा है। दूसरी ओर, केंद्रीय परियोजनाओं के मामले में निर्धारित नियमों और शर्तों को पूरा करना भी महत्वपूर्ण है। ऐसी स्थिति में दोनों पक्षों के अधिकारियों के बीच सीधे बैठक होने से समस्याओं के वास्तविक कारणों की पहचान करने और उनके समाधान करने में आसानी होगी।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता

