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वेटलैंड्स में अवैध निर्माण पर हाई काेर्ट सख्त, गृह मंत्रालय को पक्षकार बनाने का निर्देश

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वेटलैंड्स में अवैध निर्माण पर हाई काेर्ट सख्त, गृह मंत्रालय को पक्षकार बनाने का निर्देश


कोलकाता, 23 फरवरी (हि.स.)। पूर्व कोलकाता वेटलैंड्स में अवैध निर्माण के मामले में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सोमवार को सख्त रुख अपनाते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय को मामले में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया। न्यायालय ने स्पष्ट संकेत दिया कि यदि राज्य प्रशासन अवैध निर्माण हटाने में विफल रहता है तो केंद्रीय बलों की तैनाती पर भी विचार किया जा सकता है। मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को हाेगी।

न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और कोलकाता नगर निगम की भूमिका पर असंतोष जताया। अदालत के समक्ष यह आरोप रखा गया कि पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन करते हुए पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील वेटलैंड क्षेत्र को भरकर 500 से अधिक अवैध निर्माण खड़े कर दिए गए हैं।

इससे पूर्व भी न्यायालय ने मामले में कई बार सुनवाई करते हुए राज्य प्रशासन और नगर निगम की कथित निष्क्रियता पर चिंता व्यक्त की थी। अदालत ने नगर निगम को पुलिस की सहायता से अवैध निर्माणों की पहचान कर उन्हें ध्वस्त करने का निर्देश दिया था। हालांकि, न्यायालय को बताया गया कि ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया अब तक अधूरी है और कई अवैध ढांचों की पहचान भी शेष है।

सोमवार काे सुनवाई के दौरान दक्षिण 24 परगना के जिलाधिकारी ने स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद न्यायमूर्ति सिन्हा ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि बार-बार रिपोर्ट दाखिल करने के बावजूद जमीनी स्तर पर ठोस प्रगति दिखाई नहीं दे रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत को अब और रिपोर्ट नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहिए।

अदालत ने दोहराया कि उसका मुख्य उद्देश्य पूर्व में दिए गए निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन और संरक्षित वेटलैंड क्षेत्र से अवैध निर्माणों को हटाना है। न्यायमूर्ति सिन्हा ने चेतावनी दी कि यदि राज्य प्राधिकारियों ने समयबद्ध कार्रवाई नहीं की तो अदालत केंद्र सरकार से सहयोग मांगते हुए केंद्रीय बलों की तैनाती का आदेश देने में संकोच नहीं करेगी।

सुनवाई के दौरान पूर्व कोलकाता वेटलैंड्स की ओर से अधिवक्ता ने बताया कि अवैध निर्माणों के संबंध में नोटिस जारी किए जा चुके हैं और ध्वस्तीकरण के औपचारिक आदेश भी पारित किए गए हैं। हालांकि, अदालत ने कहा कि केवल नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं है और वास्तविक ध्वस्तीकरण व पुनर्स्थापन कार्य शीघ्र सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

अदालत ने निर्देश दिया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय को मामले में पक्षकार बनाया जाए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर केंद्र सरकार को आदेशों के अनुपालन की जिम्मेदारी सौंपी जा सके।------------------------

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर