रिकॉर्ड देखे बिना फ्लैट तोड़ने पर कलकत्ता हाई कोर्ट की केएमसी को फटकार, आठ सप्ताह में पुनर्निर्माण का आदेश
कोलकाता, 31 जुलाई (हि.स.)। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने रिकॉर्ड का सत्यापन किए बिना एक फ्लैट को ध्वस्त करने के मामले में कोलकाता नगर निगम (केएमसी) को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने नगर निगम की कार्रवाई को बेहद लापरवाहीपूर्ण और शर्मनाक बताते हुए क्षतिग्रस्त फ्लैट की छत का पुनर्निर्माण आठ सप्ताह के भीतर कराने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति राजा बसु चौधरी की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि किसी भी कार्रवाई से पहले संबंधित रिकॉर्ड की जांच करना नगर निगम की जिम्मेदारी थी। बिना दस्तावेजों का सत्यापन किए फ्लैट को तोड़ना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का मामला है।
मामला आनंद पालित रोड स्थित एक आवासीय भवन से जुड़ा है। याचिकाकर्ता तापस मजूमदार ने हाई कोर्ट में दावा किया कि नगर निगम ने उनके विधिवत स्वीकृत जी+4 भवन की चौथी मंजिल की छत को भी तोड़ दिया, जबकि कार्रवाई केवल कथित अवैध निर्माण के खिलाफ की जानी थी।
सुनवाई के दौरान केएमसी ने दलील दी कि भवन की स्वीकृति वर्ष 2014 में समाप्त हो गई थी, इसलिए पांचवीं मंजिल पर की गई कार्रवाई उचित थी। हालांकि अदालत ने कहा कि ध्वस्तीकरण के मूल आदेश में इस आधार का कहीं उल्लेख नहीं था और बाद में हलफनामे के जरिए नया तर्क पेश किया गया, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
अदालत ने नगर निगम को निर्देश दिया कि क्षतिग्रस्त फ्लैट की छत का पुनर्निर्माण आठ सप्ताह के भीतर पूरा किया जाए। साथ ही, यदि याचिकाकर्ता मुआवजा चाहते हैं तो वे इसके लिए सक्षम प्राधिकारी या उचित न्यायिक मंच का रुख कर सकते हैं।
इस आदेश के साथ उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक एजेंसियों को किसी भी ध्वस्तीकरण अभियान से पहले सभी अभिलेखों का सावधानीपूर्वक सत्यापन करना अनिवार्य है, ताकि निर्दोष लोगों को नुकसान न उठाना पड़े।-----------
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

