मुख्यमंत्री शुभेंदु ने 300 मतुआ परिवारों को नागरिकता प्रमाणपत्र सौंपे, सीएए दोहराया संदेश
कोलकाता, 01 अगस्त (हि. स.)। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को न्यूटाउन में आयोजित एक कार्यक्रम में उत्तर 24 परगना के 300 मतुआ लोगों को भारतीय नागरिकता के प्रमाणपत्र प्रदान किए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) किसी की नागरिकता छीनने के लिए नहीं, बल्कि नागरिकता देने के उद्देश्य से बनाया गया है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में और अधिक लोगों को भी नागरिकता प्रमाणपत्र दिए जाएंगे तथा पात्र लोगों से आगे आकर आवेदन करने की अपील की।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में मतुआ समुदाय की नागरिकता का मुद्दा लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मतुआ बहुल क्षेत्र में सभा के दौरान आश्वासन दिया था कि बांग्लादेश से शरणार्थी के रूप में भारत आए मतुआ समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता दी जाएगी। इसके बाद केंद्र में भारतीय जनता पार्टी सरकार बनने पर नागरिकता संशोधन अधिनियम पारित किया गया। हालांकि, कोरोना महामारी के कारण नागरिकता प्रदान करने की प्रक्रिया में विलंब हुआ।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कार्यक्रम में आरोप लगाया कि तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस सरकार ने राजनीतिक स्वार्थ के लिए मतुआ समुदाय को सीएए के संबंध में भ्रमित किया। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लोगों को गुमराह किया तथा सीएए का विरोध करते हुए आंदोलन और रैलियां निकालीं। उन्होंने यह भी कहा कि सीएए विरोधी आंदोलनों के दौरान सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया, ट्रेनों, स्टेशनों और बसों में आगजनी की घटनाएं हुईं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बाद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी नागरिकता देने का जो वादा किया था, उसे पूरा किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएए की आवश्यकता थी और यह कानून पात्र लोगों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने के उद्देश्य से बनाया गया है। उन्होंने दोहराया कि सरकार आगे भी पात्र लोगों को नागरिकता प्रमाणपत्र उपलब्ध कराती रहेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता

