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आसनसोल में एजुकेशन एंड करियर सेमिनार सम्पन्न, अग्निमित्रा पाल हुई सम्मानित

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आसनसोल में एजुकेशन एंड करियर सेमिनार सम्पन्न, अग्निमित्रा पाल हुई सम्मानित


आसनसोल में एजुकेशन एंड करियर सेमिनार सम्पन्न, अग्निमित्रा पाल हुई सम्मानित


आसनसोल, 24 मई (हि. स.)। आसनसोल के बर्नपुर स्थित भारती भवन में आदिवासी स्टूडेंट एंड यूथ फोरम तथा लेक्चर टैबलेट बर्नपुर की ओर से एजुकेशन एंड करियर पर चतुर्थ सेमिनार का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल की महिला एवं शिशु कल्याण तथा अर्बन डेवलपमेंट मंत्री अग्निमित्रा पाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। आयोजन समिति की ओर से उन्हें सम्मानित भी किया गया।

सेमिनार में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और स्थानीय लोग उपस्थित रहे। इस अवसर पर दुर्गादास सोरेन, शोभन दुआरी, कुंतल साधु, सौरभ चटर्जी, मिलन कर्मकार, कौशिक पाल, विदेश मुखर्जी, अली जिन्ना, हीरालाल सोरेन, घाघर सोरेन और कृष्णा हांसदा समेत कई गणमान्य लोग मौजूद थे।

अपने विस्तृत संबोधन में मंत्री अग्निमित्रा पाल ने कहा कि आदिवासी समाज के युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट सेंटर कम संस्थान स्थापित किए जाएंगे, ताकि वे केवल श्रमिक बनकर न रह जाएं बल्कि शिक्षक, डॉक्टर, प्रोफेसर और उद्योगपति बन सकें। उन्होंने कहा कि बंगाल में प्रत्येक आदिवासी छात्र-छात्रा के आत्मविश्वास को बढ़ाना बेहद जरूरी है और इसके लिए समाज के सभी अभिभावकों को अपने बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि बेटे-बेटियों में किसी प्रकार का भेदभाव न करें और सभी को समान शिक्षा का अधिकार दें, क्योंकि शिक्षा से बढ़कर कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं है।

मंत्री ने कहा कि विकास एक दिन में संभव नहीं होता, बल्कि इसके लिए सच्ची इच्छा शक्ति, सटीक परिकल्पना और लोगों के बीच खड़े रहने की मानसिकता जरूरी होती है। उन्होंने कहा कि आज के समय में दक्षता प्रशिक्षण और डिजिटल शिक्षा समाज की आवश्यकता बन चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी समाज का विकास तब तक संभव नहीं है, जब तक उसकी भाषा और संस्कृति को सम्मान न दिया जाए। भारत के इतिहास में पहली बार एक आदिवासी महिला द्रोपदी मुर्मु देश की राष्ट्रपति बनी हैं, जो पूरे आदिवासी समाज के लिए सम्मान और प्रेरणा की बात है। उन्होंने कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर एक आदिवासी महिला को स्थान देना यह दर्शाता है कि आज आदिवासी समाज भी ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है। द्रौपदी मुर्मू का जीवन संघर्ष युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है और अवसर मिलने पर आदिवासी युवा भी अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं।

मंत्री अग्निमित्रा पाल ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्राप्त करना नहीं, बल्कि आत्मसम्मान को बढ़ाना भी है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज लंबे समय तक विभिन्न प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण आधुनिक शिक्षा से वंचित रहा, लेकिन अब स्थिति बदल रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की नीतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश का संपूर्ण विकास तभी संभव है, जब समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास और शिक्षा की रोशनी पहुंचे।

उन्होंने आगे कहा कि आज शिक्षा केवल पढ़ाई-लिखाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य निर्माण का आधार है। आधुनिक आवासीय विद्यालयों के रूप में एकलव्य विद्यालयों का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि वर्तमान में सैकड़ों विद्यालयों में लाखों आदिवासी छात्र-छात्राएं शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन विद्यालयों में अंग्रेजी, विज्ञान और कंप्यूटर की आधुनिक शिक्षा दी जा रही है, जो देश में सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है।

कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन किया और इस प्रकार के शैक्षणिक कार्यक्रमों को आगे भी जारी रखने की बात कही।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा