बुद्धदेव भट्टाचार्य की औद्योगिक नीति पर फिर छिड़ी बहस, अधीर रंजन चौधरी ने उठाए सवाल
कोलकाता, 06 नवंबर (हि. स.)। पश्चिम बंगाल में नई औद्योगिक नीति की घोषणा के मंच से मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने वाममोर्चा सरकार के कार्यकाल में भूमि अधिग्रहण की नीति की कड़ी आलोचना की थी। अब कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। इसके साथ ही दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य की औद्योगिक नीति और उसे लागू करने के तरीके को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
गुरुवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2007 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने राइटर्स बिल्डिंग में स्वीकार किया था कि हल्दिया विकास प्राधिकरण के पास भूमि अधिग्रहण का नोटिस जारी करने का कानूनी अधिकार नहीं था। उनके अनुसार, यह अधिकार केवल जिला मजिस्ट्रेट या कलेक्टर के पास था। इसके बावजूद पार्टी के अंदर दबाव में आकर गलत रास्ता अपनाया गया, जिसका परिणाम 14 मार्च 2007 को नंदीग्राम की दुखद घटना के रूप में सामने आया।
शुभेंदु अधिकारी के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि बुद्धदेव भट्टाचार्य की औद्योगिकीकरण की सोच और इच्छाशक्ति पर कोई सवाल नहीं है, लेकिन सिंगूर और नंदीग्राम के मुद्दों ने तत्कालीन सरकार को भारी राजनीतिक नुकसान पहुंचाया। उन्होंने कहा कि बुद्धदेव भट्टाचार्य के कार्यकाल में ही सिंगूर और नंदीग्राम की घटनाएं हुईं, जिनके कारण राज्य में सत्ता परिवर्तन हुआ। अगर ये दोनों घटनाएं नहीं होतीं, तो सरकार बदलती या नहीं, यह कहना मुश्किल है। बुद्धदेव भट्टाचार्य की इच्छा और सोच बड़ी थी। वह समझ चुके थे कि अब कृषि से उद्योग की ओर बढ़ने का समय आ गया है। लेकिन जिस तरीके से वह आगे बढ़ना चाहते थे, उसमें जनता को साथ नहीं ले सके। इसका नतीजा उल्टा पड़ा और उनकी सरकार गिर गई।
वहीं, गुरुवार को धर्मतला में वोट चोरी के खिलाफ वामपंथियों के कार्यक्रम के बाद माकपा के वरिष्ठ नेता विमान बसु ने बुद्धदेव भट्टाचार्य के कार्यकाल की जिम्मेदारी को लेकर एक अलग बयान दिया। उन्होंने कहा कि कॉमरेड ज्योति बसु के नेतृत्व में ही वाममोर्चा सरकार की औद्योगिक नीति तैयार और घोषित की गई थी। यदि उस नीति को लेकर कोई समस्या हुई तो उसकी जिम्मेदारी ज्योति बसु के नेतृत्व वाले दौर की थी। बुद्धदेव भट्टाचार्य को केवल उस नीति को लागू करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
विमान बसु के इस बयान को बुद्धदेव भट्टाचार्य का बचाव करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, माकपा नेतृत्व ने इस पर आधिकारिक तौर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। पार्टी के अंदरूनी हलकों में चर्चा है कि बुद्धदेव सरकार की नीतिगत आलोचना की जिम्मेदारी तत्कालीन पार्टी नेतृत्व, विशेषकर उस समय के राज्य सचिव विमान बसु पर भी आ सकती है। ऐसे में विमान बसु का यह बयान अपनी राजनीतिक और संगठनात्मक जिम्मेदारी से बचने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
हिन्दुस्थान समाचार / सचिन कुमार

