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अनियमितताओं पर कार्रवाई तेज, छह और जांच के दायरे में

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अनियमितताओं पर कार्रवाई तेज, छह और जांच के दायरे में


कोलकाता, 06 अगस्त (हि. स.)। पश्चिम बंगाल सरकार ने निजी रक्त बैंकों में कथित अनियमितताओं के विरुद्ध कार्रवाई तेज कर दी है। राज्य रक्त आधान परिषद (एसबीटीसी) की शिकायत के बाद राज्य औषधि नियंत्रण विभाग ने कोलकाता के छह और निजी रक्त बैंकों की जांच शुरू कर दी है। परिषद ने इन रक्त बैंकों पर गंभीर नियामकीय उल्लंघनों का आरोप लगाया है।

इस सप्ताह की शुरुआत में स्वास्थ्य विभाग ने भवानीपुर स्थित हेल्थ प्वाइंट ब्लड बैंक को गंभीर अनियमितताएं मिलने पर बंद कर दिया था। उसे रक्त संग्रह तथा रक्त और प्लाज्मा सहित रक्त उत्पादों के संचालन से रोक दिया गया। इसके अगले दिन हाजरा स्थित पीपुल्स ब्लड बैंक को भी आवश्यक आधारभूत सुविधाओं के अभाव में रक्त संग्रह कार्य बंद करने का निर्देश दिया गया।

अब जिन छह रक्त बैंकों की जांच शुरू हुई है, उन पर बिना अनुमति रक्त और प्लाज्मा को अन्य राज्यों में भेजने, फर्जी दस्तावेज तैयार करने, रक्त संग्रह के नियमों का उल्लंघन करने तथा दाताओं और मरीजों की सुरक्षा से समझौता करने के आरोप हैं। शिकायत में जोधपुर पार्क स्थित अशोक ब्लड बैंक, बेलेघाटा के निकट ओएम ब्लड बैंक और सोनारपुर स्थित इस्पात को-ऑपरेटिव अस्पताल ब्लड सेंटर सहित अन्य रक्त बैंकों का उल्लेख किया गया है।

एसबीटीसी के अनुसार जांच में सामने आया है कि कुछ रक्तदान शिविरों में अयोग्य व्यक्तियों को चिकित्सक, नर्स और तकनीकी कर्मी के रूप में लगाया गया। अधिक रक्त संग्रह के उद्देश्य से आवश्यकता से अधिक शिविर आयोजित किए गए और शिविर प्राप्त करने के लिए बड़ी राशि खर्च की गई।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि कुछ स्थानों पर सरकार द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक रक्त लिया गया। 350 मिलीलीटर क्षमता वाले बैग में 500 मिलीलीटर तक रक्त एकत्र करने का आरोप है, जिससे रक्तदाताओं की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न उठे हैं।

जांच एजेंसियां इस बात की भी जांच कर रही हैं कि राज्य रक्त आधान परिषद और राष्ट्रीय रक्त आधान परिषद को सूचना दिए बिना रक्त और प्लाज्मा अन्य राज्यों में भेजा गया या नहीं। इसके अलावा कुछ रक्त बैंकों पर ऐसे चिकित्सकों का नाम अधिकृत चिकित्सा अधिकारी के रूप में दर्ज करने तथा स्वास्थ्य विभाग को भ्रामक और फर्जी अभिलेख सौंपने का भी आरोप है।

आरोप है कि सरकारी अभिलेखों में रक्त निःशुल्क दिखाए जाने के बावजूद मरीजों से शुल्क लिया गया। परिषद ने रक्त जांच और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की अनिवार्य प्रक्रिया का सही ढंग से पालन नहीं किए जाने पर भी चिंता व्यक्त की है।

स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखर्जी ने कुछ दिन पहले कहा था कि स्वास्थ्य विभाग ने राज्य में 100 करोड़ रुपये से अधिक के संभावित रक्त बैंक घोटाले का पता लगाया है। उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ निजी रक्त बैंक रक्तदान शिविरों के आयोजकों को महंगे उपहार देकर अधिक रक्त संग्रह करते थे, ताजा जमे प्लाज्मा का अधिक उत्पादन करने के लिए निर्धारित सीमा से अधिक रक्त निकालते थे, सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते थे और थैलेसीमिया मरीजों से अधिक शुल्क वसूलते थे।

एसबीटीसी ने राज्य औषधि नियंत्रण विभाग से छहों रक्त बैंकों का तत्काल निरीक्षण कर उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई तथा लाइसेंस संबंधी आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया है। अधिकारियों के अनुसार, मामले की जांच जारी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता