उत्तर बंगाल में भाजपा की मजबूत पकड़, तृणमूल को बड़ा झटका
अलीपुरद्वार, 05 मई (हि. स.)। पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्से में इस बार विधानसभा चुनाव के नतीजों ने साफ संकेत दिया है कि राजनीतिक हवा बदल चुकी है। 54 सीटों वाले उत्तर बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 39 सीटों पर जीत या बढ़त हासिल कर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है।
वहीं, तृणमूल कांग्रेस को कई जिलों में करारी हार का सामना करना पड़ा है। खासकर अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी और दार्जीलिंग जिलों में तृणमूल एक भी सीट नहीं जीत सकी है।
जिससे साफ़ हो गया है कि भाजपा ने चाय बागान और आदिवासी क्षेत्रों में अपना दबदबा बना लिया है। इन इलाकों में लंबे समय से उपेक्षा और विकास की कमी को लेकर लोगों में नाराजगी थी। इस बार मतदाताओं ने उसी का जवाब वोट के जरिए दिया।
चाय बागान और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में भाजपा को भारी समर्थन मिला।
जबकि सिलीगुड़ी में भाजपा के शंकर घोष ने तृणमूल के दिग्गज नेता और मेयर गौतम देव को हराकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। यह जीत बताती है कि शहरी इलाकों में भी मतदाताओं का रुझान बदल रहा है।
कूचबिहार के दिनहाटा में तृणमूल के वरिष्ठ नेता उदय गुहा को भाजपा के उम्मीदवार के हाथों बड़ी हार का सामना करना पड़ा। इससे साफ है कि सत्ता विरोधी लहर का असर गहरा रहा। जबकि पहाड़ में भी इस बार बदलाव देखने को मिला।
पहाड़ जहां पहले क्षेत्रीय दलों का प्रभाव था, वहीं अब सभी सीटों पर भाजपा ने बढ़त बना ली है। दार्जीलिंग विधानसभा केंद्र के तीनों सीटों पर भाजपा ने अपने सहयोगी दल के साथ मिलकर जीत लिया।
जबकि उत्तर दिनाजपुर और मालदा में तृणमूल को कुछ सीटें मिली है। उत्तर दिनाजपुर में तृणमूल कुछ सीटों पर अपनी पकड़ बरकरार रखी, खासकर अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में। वहीं, मालदा में मुकाबला बराबरी का रहा, जहां भाजपा और तृणमूल दोनों ने छह-छह सीटें हासिल की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परिणाम केवल चुनावी जीत-हार नहीं, बल्कि जनता के मूड का स्पष्ट संकेत है। लोगों ने दल-बदल, भ्रष्टाचार और अहंकार के खिलाफ मतदान किया है।
उत्तर बंगाल के इन नतीजों ने साफ कर दिया है कि यहां की राजनीति कोलकाता और दक्षिण बंगाल से अलग दिशा में आगे बढ़ रही है, और आने वाले समय में इसका असर पूरे राज्य की राजनीति पर देखने को मिल सकता है।
हिन्दुस्थान समाचार / सचिन कुमार

