कृषि संकट व कानून-व्यवस्था पर भाजपा ने उठाए सवाल
कोलकाता, 26 मार्च (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी ने कानून व्यवस्था सहित विभिन्न मुद्दों को लेकर राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार की आलोचना की है। गुरुवार को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने सॉल्टलेक स्थित भारतीय जनता पार्टी के राज्य कार्यालय में आयोजित पत्रकार सम्मेलन में राज्य के कृषि संकट, कानून-व्यवस्था की स्थिति और मतदाता सूची के शुद्धिकरण के मुद्दों पर चिंता व्यक्त की।
पत्रकार सम्मेलन में उन्होंने राज्य के किसानों की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि कई जिलों में आलू किसानों की आत्महत्या की घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि कर्ज का बोझ, प्राकृतिक आपदाएं और बाजार व्यवस्था की असंगतियों के कारण किसान गंभीर संकट में हैं। उत्पादित फसल का उचित मूल्य नहीं मिलना और बाजार में कृत्रिम नियंत्रण की वजह से किसान आर्थिक रूप से प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार किसानों के साथ खड़े होने में विफल रही है और न्यूनतम सहायता प्रदान करने के बजाय जिम्मेदारी दूसरों पर डाल रही है। उनके अनुसार कृषि नीति की असंगति और योजनाओं की कमी के कारण ही यह स्थिति उत्पन्न हुई है।
उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर बंगाल सहित विभिन्न क्षेत्रों में अवैध बालू उत्खनन और पर्यावरणीय समस्याओं के कारण कृषि भूमि को नुकसान पहुंच रहा है, जिससे उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है।
कानून-व्यवस्था की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में राजनीतिक हिंसा और आंतरिक संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि हाल के समय में सत्तारूढ़ दल के भीतर भी संघर्ष की घटनाओं में जानहानि हुई है, जो चिंताजनक है।
उन्होंने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में अनेक राजनीतिक कार्यकर्ताओं की हत्या हुई है और हिंसा की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। ऐसी स्थिति में उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग से सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।
पत्रकार सम्मेलन में उन्होंने रामनवमी की शोभायात्रा को रोके जाने के मुद्दे का भी उल्लेख करते हुए कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता में बाधा उत्पन्न की जा रही है, जिससे समाज में विभाजन की स्थिति बन रही है।
मतदाता सूची के शुद्धिकरण के संदर्भ में उन्होंने कहा कि त्रुटिरहित और पारदर्शी मतदाता सूची तैयार करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि फॉर्म-सात जमा करने की प्रक्रिया में बाधाएं उत्पन्न की गईं और कई मामलों में जमा किए गए फॉर्म का उचित तरीके से निपटारा नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को सभी शिकायतों की सुनवाई पूरी कर पारदर्शिता के साथ इस प्रक्रिया को समाप्त करना चाहिए। साथ ही उन्होंने बताया कि जिन मतदाताओं का नाम सूची से हट गया है, वे फॉर्म-छह के माध्यम से पुनः आवेदन कर सकते हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता

