जबरन वसूली विवाद में घायल भाजपा विधायक अस्पताल से लौटे, पार्टी में गुटबाजी के आरोप
कोलकाता, 03 नवंबर (हि. स.)। पश्चिम मेदिनीपुर जिले के डेबरा में कथित वसूली को लेकर भाजपा के भीतर शुरू हुआ विवाद अब पार्टी की गुटबाजी के आरोपों तक पहुंच गया है। मारपीट में घायल होने का दावा करने वाले डेबरा के भाजपा विधायक शुभाशीष ओम को मंगलवार को अस्पताल से छुट्टी मिल गई। सिर पर पट्टी बांधकर वह घर लौटे। जिस स्थान पर उनके साथ मारपीट होने का आरोप है, वहां मंगलवार को भी तनाव का माहौल बना रहा।
जानकारी के अनुसार, सोमवार शाम डेबरा में कथित वसूली को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच विवाद शुरू हुआ था। विधायक शुभाशीष ओम का आरोप है कि वह पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच चल रहे विवाद को सुलझाने पहुंचे थे। इसी दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने उनके साथ मारपीट की। इस घटना को लेकर भाजपा के भीतर आपसी मतभेद भी सामने आए हैं।
भाजपा के घाटाल सांगठनिक जिलाध्यक्ष तन्मय दास के बयान से भी पार्टी के अंदर चल रहे मतभेदों का संकेत मिला है। उन्होंने बताया कि विधायक के घायल होने की जानकारी मिलने पर वह अस्पताल पहुंचे थे। उस समय विधायक सामान्य रूप से चल-फिर रहे थे। उनके अनुसार, पत्रकारों के पहुंचने के बाद विधायक के सिर पर पट्टी बांधी गई। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें वसूली से संबंधित किसी शिकायत की जानकारी नहीं है।
हालांकि, किसी भी पक्ष की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराए जाने के बावजूद भाजपा के जिला अध्यक्ष ने डेबरा के 10/2 डुआ अंचल कार्यालय, डेबरा थाना और डेबरा अस्पताल के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच कराने की मांग की है।
इस मामले में खड़गपुर सदर के विधायक और राज्य के मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि यदि पार्टी के अंदर कोई विवाद हुआ है तो संगठन इसकी जांच करेगा। हिंसा या मारपीट की घटना हुई है तो पुलिस कानून के अनुसार कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि आपसी विवाद के मामले में पार्टी भी पूरी जानकारी जुटाएगी।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, विवाद की शुरुआत 10/2 डुआ अंचल कार्यालय में भाजपा की एक महिला कार्यकर्ता के साथ कथित मारपीट से हुई थी। आरोप है कि महिला कार्यकर्ता के साथ मारपीट के बाद वह शिकायत दर्ज कराने डेबरा थाने जा रही थीं। इसी दौरान विवाद बढ़ गया। भाजपा के एक गुट का आरोप है कि विधायक और उनके समर्थकों ने महिला कार्यकर्ता को थाने जाने से रोकने की कोशिश की थी। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ा।
घाटाल सांगठनिक जिलाध्यक्ष तन्मय दास ने भी महिला कार्यकर्ता को थाने जाने से रोकने और बाद में अस्पताल जाने में बाधा पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विधायक के साथ मारपीट नहीं हुई है। उनका दावा है कि अंचल कार्यालय, थाना परिसर और अस्पताल परिसर के सीसीटीवी फुटेज देखने से पूरी घटना स्पष्ट हो जाएगी। उनके अनुसार, पुलिस ने इन स्थानों के सीसीटीवी फुटेज एकत्र किए हैं। यदि जांच में किसी पार्टी कार्यकर्ता के विधायक के साथ मारपीट करने की पुष्टि होती है तो उसके खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि पूरे मामले की जानकारी प्रदेश नेतृत्व को भी दे दी गई है।
दूसरी ओर, विधायक शुभाशीष ओम ने अपने साथ मारपीट किए जाने के आरोप को दोहराया। उन्होंने कहा कि उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को एक ही झंडे के नीचे रहकर इस तरह की गतिविधियां नहीं करने की सलाह दी थी। इसके बाद कुछ कार्यकर्ताओं ने मारपीट शुरू कर दी। बीच-बचाव करने के दौरान उनके साथ भी मारपीट की गई। विधायक ने आरोप लगाया कि इस घटना में जिलाध्यक्ष के करीबी माने जाने वाले कुछ कार्यकर्ता शामिल थे।
हालांकि, मंगलवार शाम तक डेबरा थाने में इस मामले में किसी भी पक्ष की ओर से लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता

