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विस चुनाव 2026 : राज्य में बाहरी लोगों के प्रवेश संबंधी ममता बनर्जी के दावों को भाजपा ने किया खारिज

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विस चुनाव 2026 : राज्य में बाहरी लोगों के प्रवेश संबंधी ममता बनर्जी के दावों को भाजपा ने किया खारिज


कोलकाता, 20 मार्च (हि.स.)। विधानसभा चुनाव में राज्य के बाहर से लोग लाये जाने संबंधी ममता बनर्जी के आरोपों को भारतीय जनता पार्टी ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर चुनाव से पहले “हताशा भरे” आरोप लगाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य में बाहरी लोगों के प्रवेश को लेकर मुख्यमंत्री के बयान उनकी राजनीतिक चिंता को दर्शाते हैं।

कोलकाता में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भट्टाचार्य ने कहा कि मुख्यमंत्री के दावे राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने कहा, “अगर उनके तर्क को मानें, तो यह पुलिस की विफलता को दर्शाता है कि वह ऐसे तत्वों की निगरानी नहीं कर पा रही, जो कथित रूप से हथियारों के साथ राज्य में प्रवेश कर रहे हैं।”

भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि तृणमूल (टीएमसी) प्रमुख चुनावी हार की आशंका में इस तरह का माहौल बना रही हैं। उन्होंने कहा, “एक अनुभवी राजनेता होने के नाते उन्हें (ममता बनर्जी को) अंदेशा है कि उनकी पार्टी सत्ता में नहीं लौटेगी, इसलिए इस तरह के उकसाने वाले बयान दिए जा रहे हैं।”

उल्लेखनीय है कि इससे पहले ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी के उम्मीदवारों की सूची जारी करते हुए चुनाव के दौरान भाजपा की मदद के लिए “बाहरी लोगों” को पश्चिम बंगाल लाये जाने का दावा करते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं से सतर्क रहने को कहा था।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी दावा किया कि तृणमूल आगे होने वाली किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में , भाजपा और इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया दोनों को जिम्मेदार ठहराएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि अतीत में टीएमसी कार्यकर्ताओं ने भाजपा नेताओं और पत्रकारों पर हमले किए हैं और ऐसे मामलों में दर्ज एफआईआर तथा गिरफ्तारियों की संख्या पर भी सवाल उठाए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा टीएमसी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी संबंधी आरोपों पर भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि यह बयान 2021 के चुनाव बाद हुई हिंसा से जुड़े मामलों में दर्ज एफआईआर के आधार पर कानूनी कार्रवाई के संदर्भ में था।

शासन के मुद्दों पर भट्टाचार्य ने राज्य सरकार की रोजगार नीति की आलोचना करते हुए ‘युवा साथी’ योजना का जिक्र किया और कहा कि यह रोजगार सृजन में विफलता का संकेत है। उन्होंने बंगाल ग्लोबल बिज़नस समिट के परिणामों पर भी सवाल उठाते हुए दावा किया कि निवेशक राज्य के बजाय अन्य राज्यों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

इसके अलावा उन्होंने बाल विवाह और स्कूल छोड़ने की दर जैसे सामाजिक संकेतकों को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि यह सरकार के विकास के दावों के विपरीत हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता