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आसनसोल : काली पहाड़ी से हटाया गया “विश्व बांग्ला” ग्लोब, चर्चाएं तेज

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आसनसोल : काली पहाड़ी से हटाया गया “विश्व बांग्ला” ग्लोब, चर्चाएं तेज


आसनसोल, 26 मई (हि. स.)। राज्य में सरकार परिवर्तन के बाद अब उसका असर शहर की पहचान और सरकारी प्रतीकों पर भी दिखाई देने लगा है। औद्योगिक नगरी आसनसोल के प्रमुख प्रवेश द्वार काली पहाड़ी पर लगा “विश्व बांग्ला” का विशाल ग्लोब मंगलवार को हटा दिया गया। इस घटना को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

बताया जाता है कि काली पहाड़ी लंबे समय से आसनसोल शहर की पहचान का एक अहम हिस्सा रही है। पहले यहां “सिटी ऑफ़ ब्रदरहुड” लिखा एक बड़ा प्रवेश द्वार था, जो शहर की सांस्कृतिक एकता और भाईचारे का संदेश देता था। बाद में तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान इस पुराने ढांचे को बदलकर “विश्व बांग्ला” थीम पर नया गेट बनाया गया और उसके ऊपर “विश्व बांग्ला” ग्लोब स्थापित किया गया, जो राज्य सरकार की ब्रांडिंग का प्रतीक बन गया था।

मंगलवार को जैसे ही ग्लोब हटाने का काम शुरू हुआ, मौके पर स्थानीय लोगों और राहगीरों की भीड़ जुट गई। कई लोगों ने इस पूरे घटनाक्रम को अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड भी किया। इस दौरान मौके पर संजय चौरसिया, सुमंत बाउरी, आशीष बाउरी और शिवम सहित कई लोग मौजूद थे।

इस बदलाव को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोगों का मानना है कि यह नई सरकार की अपनी पहचान स्थापित करने की कोशिश है, जबकि अन्य इसे शहर के सौंदर्यीकरण और पुनर्गठन का हिस्सा बता रहे हैं।

इस संबंध में भाजपा युवा मोर्चा के स्टेट कमिटी सदस्य और पुरुलिया डिवीजन के कन्वेनर राहुल सिंह ने बताया कि नए प्रवेश द्वार के डिजाइन और नाम को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। राज्य स्तर से निर्देश मिलने के बाद ही आगे की रूपरेखा तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि नई सरकार शहर की औद्योगिक विरासत, सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए नया डिजाइन तैयार कर सकती है।

भाजपा युवा मोर्चा पुरुलिया विभाग प्रभारी राहुल सिंह ने यह भी कहा कि बंगाल की राजनीति में प्रतीकों का विशेष महत्व रहा है। ऐसे में “विश्व बांग्ला” ग्लोब को हटाना सिर्फ एक ढांचागत बदलाव नहीं, बल्कि सरकार बदलने के बाद प्रशासनिक प्राथमिकताओं और राजनीतिक सोच में बदलाव का संकेत भी माना जा रहा है।

हालांकि प्रशासन की ओर से अब तक इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा