पश्चिम बंगाल में जन्म-मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था में व्यापक प्रशासनिक बदलाव लागू
कोलकाता, 24 जुलाई (हि.स.)। पश्चिम बंगाल सरकार ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था में बड़ा प्रशासनिक बदलाव करते हुए ग्राम पंचायत प्रधानों तथा नगर निकायों के अध्यक्षों और कार्यपालक अधिकारियों से पंजीयक के अधिकार वापस ले लिए हैं। अब यह जिम्मेदारी जिला अधिकारियों, स्वास्थ्य विभाग के नामित अधिकारियों तथा सरकारी अस्पतालों के प्रमुखों को सौंपी जाएगी।
राज्य सरकार की ओर से शुक्रवार को जारी अधिसूचना में यह व्यवस्था लागू की गई। इससे एक दिन पहले मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल ने घोषणा की थी कि जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार अब निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के पास नहीं रहेगा। यह अधिकार केवल नामित सरकारी अधिकारियों को दिया जाएगा।
मुख्य सचिव ने बताया था कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्रों में कई अनियमितताएं सामने आई थीं। इसके बाद व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और उत्तरदायी बनाने के लिए यह निर्णय लिया गया।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सामाजिक माध्यम 'एक्स' पर कहा कि राज्य सरकार जनसेवाओं को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और सुगम बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। इसी उद्देश्य से जन्म और मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था में महत्वपूर्ण संरचनात्मक सुधार किए गए हैं।
अधिसूचना के अनुसार, जिला मजिस्ट्रेट अब जिले के जन्म और मृत्यु पंजीकरण के जिला पंजीयक होंगे। उन्हें खंड चिकित्सा अधिकारी, ग्रामीण एवं शहरी सरकारी अस्पतालों के अधीक्षक तथा सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों के प्रमुखों को संस्थागत जन्म और मृत्यु के पंजीयक के रूप में नियुक्त करने का अधिकार दिया गया है।
सरकार प्रत्येक ग्राम पंचायत और नगर निकाय के लिए समर्पित सरकारी अधिकारियों को पंजीयक नियुक्त करेगी, जिससे अभिलेखों का रखरखाव और प्रशासनिक कार्य अधिक सुव्यवस्थित हो सके।
राज्य सरकार ने वर्ष 1997 से जारी सभी जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्रों का पुनः सत्यापन कराने का भी निर्णय लिया है। इसके लिए घर-घर जाकर जांच की जाएगी और फर्जी पाए जाने वाले प्रमाणपत्र निरस्त कर दिए जाएंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता

