(साक्षात्कार) जीत को लेकर आश्वस्त भाजपा प्रत्याशी भद्र हेमब्रम
पश्चिम मेदिनीपुर, 11 अप्रैल (हि.स.)। समय के साथ राजनीति की दिशा और प्राथमिकताएं बदलती रहती हैं। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में भद्र हेमब्रम तृणमूल कांग्रेस से उम्मीदवार बनने की उम्मीद लगाए हुए थे, लेकिन उन्हें पार्टी का टिकट नहीं मिल सका। अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। इस बार भद्र हेमब्रम भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरकर तृणमूल कांग्रेस को चुनौती दे रहे हैं। वे पश्चिम मेदिनीपुर की केशियारी विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं।
हिन्दुस्थान समाचार के साथ विशेष बातचीत के दौरान उन्होंने बताया एक समय उनका जीवन अत्यंत गरीबी में बीता। खेतों में हल चलाना, अपने पिता के साथ बाजार में मछली बेचना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। कॉलेज की पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए उन्होंने राजमिस्त्री के साथ काम भी किया। बाद में शिक्षक की नौकरी मिलने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति सुधरी।
अब वे भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं और उनके खिलाफ तृणमूल कांग्रेस ने भी एक शिक्षक, रामजीवन मंडी को उम्मीदवार बनाया है। निवर्तमान विधायक परेश मुर्मू को इस बार टिकट नहीं मिला। पार्टी के अंदरूनी मतभेद भी चर्चा में हैं।
भद्र हेमब्रम का दावा है कि उन्हें जनता का पूरा समर्थन मिल रहा है। उनका कहना है, “मैं जीत को लेकर 100 प्रतिशत आश्वस्त हूं। इस सरकार ने विकास का कोई काम नहीं किया है।”
वे आरोप लगाते हैं कि सुवर्णरेखा नदी के कटाव को रोकने में सरकार विफल रही है। नापो क्षेत्र में बना बड़ा भवन अब असामाजिक तत्वों का अड्डा बन गया है। बस स्टैंड, “कर्मतीर्थ” जैसी परियोजनाओं की हालत खराब है। कई सड़क और सौंदर्यीकरण परियोजनाएं भी अधूरी हैं।
भद्र पहले तृणमूल कांग्रेस से भी जुड़े रहे हैं। वे छात्र राजनीति से आगे बढ़े और 1998 में तृणमूल छात्र परिषद से जुड़े। 2000 में उन्होंने पंचायत उपचुनाव में भी हिस्सा लिया। 2006 में वे क्षेत्रीय स्तर पर पदाधिकारी बने और एसटी सेल के जिला अध्यक्ष भी रहे।
2021 में टिकट न मिलने से वे नाराज हुए, लेकिन पार्टी में काम करते रहे। 2022 में उन्हें एसटी सेल के पद से हटा दिया गया। इसके बाद उन्होंने शिक्षण और सामाजिक कार्यों पर ध्यान दिया।
2025 में उन्होंने ऑनलाइन भाजपा की सदस्यता ली और 2026 में केशियारी से उम्मीदवार बन गए। वे कहते हैं कि क्षेत्र में भाजपा का संगठन पहले से मजबूत रहा है और लोग बदलाव चाहते हैं।
भद्र का कहना है, “मैंने अपने जीवन में संघर्ष और गरीबी देखी है, साधारण लोगों का दर्द समझता हूं। जीतने के बाद हमेशा जनता के साथ रहूंगा।”
दूसरी ओर तृणमूल प्रत्याशी रामजीवन मंडी का कहना है कि क्षेत्र में काफी विकास कार्य हुए हैं और जनता का समर्थन उन्हें मिल रहा है। वहीं पूर्व विधायक परेश मुर्मू भी अपनी पार्टी के उम्मीदवार के समर्थन में प्रचार कर रहे हैं और जीत का दावा कर रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता

