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दिलीप घोष ने बंगाल के पारंपरिक मिठाई उद्योग को आधुनिक बनाने पर दिया जोर

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दिलीप घोष ने बंगाल के पारंपरिक मिठाई उद्योग को आधुनिक बनाने पर दिया जोर


कोलकाता, 21 अगस्त (हि. स.)। चीनी और अन्य कच्चे माल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से बंगाल के मिठाई कारोबारी परेशान हैं। उत्पादन लागत बढ़ने के कारण कारोबार पर दबाव बढ़ता जा रहा है। कारोबारियों ने सरकार से चीनी सहित जरूरी कच्चे माल की कीमतों पर नियंत्रण के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की है।

विश्व बांग्ला मेला प्रांगण में शुक्रवार को आयोजित ‘मिष्ठी उद्यम’ कार्यक्रम में मिठाई कारोबारियों ने अपनी समस्याएं सामने रखीं। कारोबारियों ने इस संबंध में मंत्री दिलीप घोष को लिखित आवेदन सौंपकर चीनी की बढ़ती कीमत पर नियंत्रण की मांग की।

कारोबारियों के अनुसार मिठाई तैयार करने में चीनी सबसे प्रमुख कच्चे माल में शामिल है। इसके साथ दूध, खोया और अन्य जरूरी सामग्री की कीमतें भी बढ़ रही हैं। इससे मिठाई उत्पादन की लागत लगातार बढ़ रही है। कारोबारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बढ़ी हुई लागत और ग्राहकों पर कीमत का अतिरिक्त बोझ डालने के बीच संतुलन बनाने की है।

कारोबारियों ने कहा कि यदि उत्पादन लागत इसी तरह बढ़ती रही तो पारंपरिक मिठाई कारोबार पर इसका सीधा असर पड़ेगा। खासकर छोटे और मध्यम कारोबारियों के लिए बढ़ती लागत के बीच कारोबार चलाना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने सरकार से बाजार में चीनी की कीमत को नियंत्रित करने के लिए शीघ्र हस्तक्षेप की मांग की।

कार्यक्रम में भाजपा के वरिष्ठ नेता पंचायत और ग्राम विकास मंत्री दिलीप घोष ने बंगाल के पारंपरिक मिठाई और नमकीन उद्योग को आधुनिक तकनीक से जोड़कर आगे बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने मिठाई और नमकीन तैयार करने वाले प्रतिष्ठानों के प्रतिनिधियों के साथ उद्योग से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की।

दिलीप घोष ने कहा कि बंगाल की मिठाई की अपनी अलग पहचान है। आधुनिक तकनीक, बेहतर पैकेजिंग और गुणवत्ता में सुधार के जरिए इसे देश और विदेश के बाजारों में और मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस उद्योग को बढ़ावा मिलने से इससे जुड़े कारीगरों, छोटे कारोबारियों और उद्यमियों को आर्थिक लाभ मिलेगा।

कार्यक्रम में उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ाने, पैकेजिंग को आधुनिक बनाने और निर्यात की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। कारोबारियों ने बंगाल के पारंपरिक मिठाई उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर पहचान दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की बात कही।

दिलीप घोष ने कहा कि बंगाल की मिठाई केवल कारोबार का हिस्सा नहीं, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान भी है। इस पारंपरिक उद्योग को आधुनिक स्वरूप देने के साथ इससे जुड़े लोगों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए प्रयास जारी रहेंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता