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बेलडांगा के हालात पर हाई कोर्ट सख्त, कहा-जरूरत पर केंद्रीय बल उपयोग किया जा सकता है

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बेलडांगा के हालात पर हाई कोर्ट सख्त, कहा-जरूरत पर केंद्रीय बल उपयोग किया जा सकता है


कोलकाता, 20 जनवरी (हि.स.)। पश्चिम बंगाल में मुर्शिदाबाद जिले के विभिन्न इलाकों में लगातार हो रही अशांति की घटनाओं को लेकर कलकत्ता उच्च न्यायालय ने गंभीर चिंता जताई है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सुजय पाल और न्यायमूर्ति पार्थसारथी सेन की डिवीजन बेंच ने पुलिस अधीक्षक और जिला मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया कि किसी भी हालत में नई अशांति न होने दी जाए और इसके लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं।

बेलडांगा से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि आवश्यकता पड़ने पर केंद्रीय सशस्त्र बलों का उचित इस्तेमाल किया जा सकता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बेलडांगा को दोबारा किसी भी तरह से असुरक्षित स्थिति में नहीं जाने दिया जाएगा और इसी कारण अदालत को हस्तक्षेप करना पड़ रहा है।

अदालत ने कहा कि यदि किसी जिले में इस तरह की घटनाएं बार-बार हो रही हैं, तो प्रशासन को पूर्व नियोजन के तहत लोगों की जान-माल और आजीविका की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि यदि सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) का समुचित उपयोग नहीं किया गया, तो इस संबंध में हलफनामा दाखिल होने के बाद मामले की न्यायिक समीक्षा की जाएगी। हालांकि, अदालत ने फिलहाल वहां के लोगों की सुरक्षा और जीवन-यापन को प्राथमिक चिंता बताया।

मुर्शिदाबाद के बेलडांगा इलाके में 16 जनवरी को भारी तनाव और हिंसा की स्थिति उत्पन्न हुई थी, जबकि 17 जनवरी को भी अशांति की घटनाएं सामने आईं। इन घटनाओं को लेकर 19 जनवरी को कलकत्ता उच्च न्यायालय में दो जनहित याचिकाएं दायर की गईं। एक याचिका भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से और दूसरी स्थानीय निवासियों द्वारा दाखिल की गई।

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि इससे पहले मुर्शिदाबाद के ही शमशेरगंज में अशांति के दौरान उच्च न्यायालय ने केंद्रीय बलों की तैनाती का निर्देश दिया था और इसी तरह का कदम इस मामले में भी उठाया जाना चाहिए। अदालत ने मौखिक रूप से सुझाव दिया कि जरूरत पड़ने पर शमशेरगंज में तैनात केंद्रीय बलों का भी उपयोग किया जा सकता है।

इस बीच, भाजपा ने मामले की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) जांच की मांग उठाई है। हालांकि, अदालत ने इस मांग पर निर्णय लेने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार पर छोड़ी है।

कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार दोनों को दो सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल कर अपना पक्ष स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। साथ ही कहा गया है कि जहां भी आवश्यकता हो, वहां केंद्रीय बलों की तैनाती के लिए केंद्र सरकार को उचित कदम उठाने होंगे।---------------------

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर