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बारुईपुर दुष्कर्म और हत्या मामला : मुख्य आरोपित को पहले छोड़ने पर पुलिस पर सवाल, पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हुए कई चौंकाने वाले खुलासे

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बारुईपुर दुष्कर्म और हत्या मामला : मुख्य आरोपित को पहले छोड़ने पर पुलिस पर सवाल, पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हुए कई चौंकाने वाले खुलासे


कोलकाता, 07 जुलाई (हि. स.)। दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में 12 वर्षीय नाबालिग के अपहरण, सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सोमवार को पुलिस ने मुख्य आरोपित आनंद सरदार को विशेष कार्यबल (एसटीएफ) और विशेष अभियान समूह (एसओजी) के संयुक्त अभियान में गिरफ्तार कर लिया, लेकिन आरोप है कि रविवार को उसे पुलिस चौकी लाया गया था और कुछ देर बाद बिना कार्रवाई के वहां से जाने दिया गया।

इस घटनाक्रम के बाद स्थानीय लोगों, विपक्षी दलों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि पीड़िता के परिवार द्वारा शिकायत किए जाने के बावजूद पुलिस ने समय पर कार्रवाई नहीं की और आरोपितों के खिलाफ तत्काल कदम उठाने के बजाय देरी की।

पीड़िता के परिवार से सोमवार को मुलाकात करने पहुंचे माकपा नेता सुजन चक्रवर्ती ने कहा कि परिवार को न्याय मिलना चाहिए, लेकिन केवल अपराधियों ही नहीं बल्कि लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना वाले दिन परिवार ने पुलिस को सूचना दी थी, इसके बावजूद तत्काल कार्रवाई नहीं की गई और मुख्य आरोपित को पकड़ने के बाद भी छोड़ दिया गया।

महिलाओं के 'रात दखल' आंदोलन की संयोजक रिमझिम सिंह ने भी पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिना उचित जांच किसी राजनीतिक हस्तक्षेप के आधार पर आरोपितों को छोड़ना गंभीर मामला है। उनका कहना था कि इतने जघन्य अपराध के बाद भी पुलिस ने स्वयं व्यापक खोज अभियान नहीं चलाया, जिसके कारण स्थानीय लोगों को तलाश अभियान शुरू करना पड़ा।

इधर, दक्षिण 24 परगना जिला इकाई की अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने भी बारुईपुर थाने को पत्र भेजकर आरोप लगाया है कि पीड़िता के परिवार की शिकायत के छह घंटे बाद तक पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई नहीं की।

मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से सात दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने अब तक की गई कार्रवाई, जांच की प्रगति तथा आरोपित की पिटाई के बाद हुई मौत से जुड़े घटनाक्रम की भी जानकारी तलब की है।

इस मामले में पुलिस ने पहले प्रभास मंडल और दिवाकर सरदार को गिरफ्तार किया था। दोनों को सोमवार को बारुईपुर अदालत में पेश किया गया। सरकारी पक्ष ने अदालत से कहा कि मामला अत्यंत संवेदनशील है और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने सहित कई महत्वपूर्ण जांच अभी बाकी हैं। साथ ही साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका भी जताई गई। अदालत ने दोनों आरोपितों को 14 दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया। मुख्य आरोपित आनंद सरदार को मंगलवार को अदालत में पेश किया जाएगा।

उधर, पोस्टमार्टम की प्रारंभिक रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार नाबालिग के फेफड़ों में कीचड़युक्त पानी मिला है, जिससे आशंका है कि उसे जीवित अवस्था में बोरे में बंद कर तालाब में फेंका गया था। यदि हत्या के बाद शव पानी में डाला जाता तो फेफड़ों में पानी नहीं मिलता। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि पीड़िता के साथ बर्बर यौन हिंसा की गई थी। उसके निजी अंगों पर कई गंभीर चोटों के निशान मिले हैं तथा सिर पर भी गहरी चोट पाई गई है, जिससे अत्यधिक रक्तस्राव हुआ था। चिकित्सकों ने अत्यधिक रक्तस्राव और पानी में डूबने से दम घुटने को मृत्यु का संभावित कारण बताया है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार नाबालिग की मौत शनिवार देर रात हुई।

जांच एजेंसियां पोस्टमार्टम रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज और गिरफ्तार आरोपितों के बयानों के आधार पर पूरी घटना का पुनर्निर्माण कर रही हैं। शुरुआती जांच में यह आशंका भी जताई जा रही है कि अपराध पूर्व नियोजित हो सकता है।

सोमवार को बारुईपुर थाने पहुंचीं सामाजिक कार्यकर्ता रिमझिम सिंह ने कहा कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी पुलिस ने प्रभावी खोज अभियान क्यों नहीं चलाया और यदि समय रहते कार्रवाई होती तो बाद में हुई हिंसा जैसी घटनाओं से बचा जा सकता था।

इस बीच, जिस तालाब से नाबालिग का शव बरामद हुआ था, उसी तालाब से सोमवार को एक अन्य व्यक्ति का शव भी मिला। मृतक की पहचान कृष्णकांत हलदार के रूप में हुई है, जो पिछले शुक्रवार से लापता था। पुलिस फिलहाल यह जांच कर रही है कि इस मौत का नाबालिग की हत्या के मामले से कोई संबंध है या नहीं।

घटना के बाद पूरे गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। बारुईपुर, नरेंद्रपुर और सोनारपुर थाना क्षेत्रों के कई हिस्सों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 लागू कर दी गई है। मुख्यमंत्री के मंगलवार को बारुईपुर जाने की संभावना है।

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर