पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा, किशोरी को जीवित ही तालाब में फेंका
कोलकाता, 07 जुलाई (हि. स.)। दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में 12 वर्षीय किशोरी सामूहिक दुष्कर्म के साथ और नृशंस हत्या मामले में पुलिस जांच में कई चौंकाने वाले और रोंगटे खड़े करने वाले तथ्य सामने आए हैं। जिस तालाब से किशोरी का शव बरामद हुआ था, उसके पास स्थित एक झोपड़ी ही इस खौफनाक वारदात का मुख्य केंद्र थी। पुलिस के प्राथमिक अनुमान के अनुसार, मृतका को शराब और गांजे के अड्डे पर ले जाकर शारीरिक प्रताड़ना दी गई और फिर जीवित अवस्था में ही उसे बोरे में बंद कर तालाब में फेंक दिया गया।
इस जघन्य हत्याकांड के सिलसिले में बारुईपुर थाना पुलिस ने मुख्य आरोपित आनंद सरदार के साथ-साथ प्रभास मंडल और दिवाकर सरदार नाम के दो अन्य आरोपितों को गिरफ्तार किया है।
जांचकर्ताओं के दावों के मुताबिक, घटना वाले दिन प्रभास नाम का आरोपित चालाकी से किशोरी को बहला-फुसलाकर उस झोपड़ी में ले गया था। वहां आनंद और दिवाकर पहले से ही मौजूद थे। आरोप है कि तीनों ने वहां बैठकर पहले नशा किया और उसके बाद नाबालिग पर टूट पड़े। तीनों ने मिलकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।
पुलिस की प्रारंभिक जांच और पोस्टमार्टम की शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, अत्याचार के दौरान एक आरोपित ने किशोरी के गले पर अपना पैर रख दिया था, जिससे उसका दम घुटने लगा। इसके अलावा, मृतका के गुप्तांगों पर गंभीर चोट के निशान मिले हैं। उसके सिर पर भी भारी वस्तु से वार किया गया था या फिर उसका सिर दीवार या फर्श से टकराया गया था। इस नारकीय प्रताड़ना के बाद लहूलुहान और गंभीर रूप से घायल किशोरी को काफी देर तक उसी झोपड़ी में छोड़ दिया गया था।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि शनिवार देर रात आरोपितों ने शव को ठिकाने लगाने की योजना बनाई। जब उसे झोपड़ी में अचेत छोड़ा गया था, तब उसकी सांसें चल रही थीं। मृतका के परिजनों और रिश्तेदारों ने पुलिस पर निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए कहा है कि अगर समय रहते तलाश शुरू की जाती, तो शायद बच्ची को जिंदा बचाया जा सकता था।
जांच में सामने आया है कि रात गहराते ही आरोपितों ने अचेत किशोरी को एक प्लास्टिक की बोरी में भरने की कोशिश की, लेकिन बोरी फट गई। इसके बाद वे उसे पास के तालाब में फेंक आए और फटी बोरी से उसे ढकने का प्रयास किया। पोस्टमार्टम की प्राथमिक रिपोर्ट में 'एंटीमॉर्टम ड्राउनिंग' का उल्लेख है, जिसका अर्थ है कि जब किशोरी को पानी में फेंका गया, तब वह जीवित थी। डूबने के कारण उसके फेफड़ों और पेट में भारी मात्रा में पानी भर गया था, जिससे उसकी मौत हो गई।
पुलिस के अनुसार, वारदात को अंजाम देने के बाद तीनों आरोपित अलग-अलग रास्तों से फरार हो गए थे। हालांकि, बारुईपुर थाना पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए प्रभास, आनंद और दिवाकर को गिरफ्तार कर लिया है।
फिलहाल तीनों से कड़ी पूछताछ की जा रही है। जांच अधिकारी अब विसरा रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं ताकि मामले में पुख्ता सबूत अदालत के समक्ष पेश किए जा सकें।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता

