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बंगाल में अवैध बांग्लादेशियों के खिलाफ अभियान तेज, सरकार ने दिए कड़े निर्देश

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बंगाल में अवैध बांग्लादेशियों के खिलाफ अभियान तेज, सरकार ने दिए कड़े निर्देश


कोलकाता, 27 मई (हि. स.)। पश्चिम बंगाल में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर सियासत तेज हो गई है। राज्य सरकार ने सभी जिलों में होल्डिंग सेंटर बनाने के निर्देश दिए हैं, ताकि अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों की पहचान कर उन्हें वापस भेजा जा सके। इस मुद्दे पर राज्य के पंचायत एवं पशुपालन विकास मंत्री दिलीप घोष ने साफ शब्दों में कहा कि “बांग्लादेशी यहां क्यों रहेंगे?”

उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें अलग किया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि अवैध घुसपैठियों को वापस भेजा जाएगा। मंत्री ने कहा कि अगर वे स्वेच्छा से अपने देश लौट जाते हैं तो बेहतर होगा, अन्यथा सरकार आवश्यक कदम उठाने के लिए बाध्य होगी।

दरअसल, दो फरवरी 2025 को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अवैध घुसपैठियों और रोहिंग्याओं की पहचान, हिरासत और प्रत्यर्पण को लेकर नई गाइडलाइन जारी की थी। हालांकि उस समय राज्य में तृणमूल कांग्रेस की सरकार ने इस निर्देश को लागू नहीं किया था। अब भाजपा सरकार बनने के बाद “डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट” प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

इस अभियान के शुरू होते ही सीमावर्ती इलाकों में हलचल बढ़ गई है। हाकिमपुर चेकपोस्ट पर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ देखी गई, जहां कई लोग बांग्लादेश लौटने के लिए पहुंचे।

पिछले कई वर्षों से भाजपा लगातार आरोप लगाती रही है कि पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में अवैध बांग्लादेशी रह रहे हैं। पार्टी का दावा है कि उन्हें वोटर कार्ड, आधार कार्ड और राशन कार्ड जैसी सुविधाएं दी गईं, जिससे राज्य की जनसंख्या संरचना प्रभावित हो रही है और स्थानीय लोग सरकारी सुविधाओं से वंचित हो रहे हैं।

इसी मुद्दे को लेकर भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच लंबे समय से राजनीतिक टकराव जारी है। अब राज्य सरकार की नई कार्रवाई के बाद यह मामला फिर से राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता