छह साल बाद नये रूप में लौटेगी ‘बंगलक्ष्मी’ लॉटरी
कोलकाता, 29 मई (हि.स.)।
राज्य सरकार एक बार फिर सरकारी लॉटरी सेवा को शुरू करने की योजना बना रही है। इसके तहत पहले से चर्चित “बंगलक्ष्मी” योजना को नए रूप में वापस लाया जा सकता है। सरकार का उद्देश्य राज्य का राजस्व बढ़ाना और लॉटरी संचालन में अधिक पारदर्शिता लाना है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, राज्य के वित्त विभाग ने लॉटरी सेवा संचालन के लिए टेंडर जारी करने की तैयारी शुरू कर दी है। सरकार की योजना अगले वित्तीय वर्ष से नई व्यवस्था लागू करने की है। बताया जा रहा है कि इस संबंध में विधानसभा में 22 जून को पेश होने वाले राज्य बजट में विशेष प्रस्ताव भी शामिल किया जा सकता है।
गौरतलब है कि मार्च 2020 में जीएसटी स्लैब में बदलाव के बाद राज्य की लॉटरी सेवा बंद कर दी गई थी। इससे पहले कई वर्षों तक राज्य में लॉटरी सेवा बाहरी एजेंसियों और वितरकों के माध्यम से संचालित होती थी। सूत्रों का दावा है कि इस व्यवस्था के कारण राज्य को भारी राजस्व नुकसान हुआ।
वाम मोर्चा शासन के दौरान लॉटरी सेवा सीधे वित्त विभाग के नियंत्रण में थी। लेकिन 2011 में तृणमूल कांग्रेस सरकार आने के बाद विभाग धीरे-धीरे इस संचालन से पीछे हट गया और निजी ऑपरेटरों की भूमिका बढ़ गई।
अब नई व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया है कि अनसोल्ड टिकटों को लॉटरी ड्रॉ में शामिल न किया जाए, ताकि किसी भी तरह की हेराफेरी रोकी जा सके और लोगों का भरोसा फिर से कायम हो।
फिलहाल राज्य में निजी ऑपरेटरों के जरिए लॉटरी का वितरण किया जाता है। लॉटरी पर वर्तमान में 40 प्रतिशत जीएसटी लगता है। सूत्रों के अनुसार, राज्य में लॉटरी कारोबार और जीएसटी संग्रह से कुल राजस्व लगभग 5000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, जिसमें राज्य को करीब 200 करोड़ रुपये जीएसटी के रूप में मिल सकते हैं।
जानकारी के मुताबिक 2009-10 में राज्य सरकार ने लॉटरी सेवाओं से लगभग 2000 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया था। अब सरकार उसी मॉडल को आधुनिक और डिजिटल रूप में फिर से लागू करने की तैयारी कर रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा

