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बाबूघाट से मायापुर तक शुरू होगी सीधी फेरी सेवा

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बाबूघाट से मायापुर तक शुरू होगी सीधी फेरी सेवा


कोलकाता, 31 अगस्त (हि. स.)। पश्चिम बंगाल का पर्यटन विभाग राज्य में धार्मिक और विरासत पर्यटन को नई पहचान देने की दिशा में एक विशेष पहल करने जा रहा है। राज्य सरकार की योजना के तहत कोलकाता के बाबूघाट से मायापुर तक सीधे फेरी सेवा शुरू करने पर विचार किया जा रहा है।

इस योजना के माध्यम से गंगा नदी के दोनों किनारों पर स्थित धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थानों को जलमार्ग के जरिए आपस में जोड़ने की योजना है। योजना लागू होने पर पर्यटक भविष्य में फेरी या अन्य जलयान से गंगा के रास्ते पश्चिम बंगाल के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों की सैर कर सकेंगे।

प्रस्तावित बाबूघाट-मायापुर रूट पर दो हाइब्रिड डीजल-इलेक्ट्रिक फेरियां चलाने की योजना बनाई जा रही है। मायापुर पश्चिम बंगाल के प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्रों में शामिल है, जहां हर वर्ष देश और विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। फिलहाल कोलकाता से मायापुर सड़क और रेल मार्ग से जाया जा सकता है, लेकिन जलमार्ग शुरू होने से यात्रा अधिक आकर्षक और अलग आनंददायक हो सकती है।

योजना के अनुसार, पर्यटक बाबूघाट से फेरी में सवार होकर गंगा नदी के रास्ते सीधे मायापुर पहुंच सकेंगे। इस यात्रा का उद्देश्य केवल गंतव्य तक पहुंचाना नहीं, बल्कि पर्यटकों को गंगा के रास्ते एक यादगार पर्यटन अनुभव प्रदान करना भी है।

राज्य सरकार केवल मायापुर तक ही इस जलमार्ग पर्यटन को सीमित नहीं रखना चाहती। गंगा तट पर स्थित दक्षिणेश्वर और बेलूर मठ समेत कई धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को भी जलमार्ग पर्यटन से जोड़ने की योजना पर काम किया जा रहा है।

राज्य के पर्यटन मंत्री शंकर घोष के अनुसार, नदी किनारे स्थित महत्वपूर्ण धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को जलमार्ग के माध्यम से जोड़ने की दिशा में सरकार काम कर रही है। भविष्य में पर्यटक एक ही जल यात्रा के दौरान गंगा किनारे स्थित कई प्रमुख दर्शनीय स्थलों का भ्रमण कर सकेंगे।

प्रस्तावित योजना में अन्नपूर्णा मंदिर, हंसश्वरि मंदिर, दक्षिणेश्वर और बेलूर मठ जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों को भी एक ही जल पर्यटन नेटवर्क से जोड़ने पर विचार किया जा रहा है। यदि यह योजना धरातल पर उतरती है तो पश्चिम बंगाल के पर्यटन क्षेत्र को एक नई पहचान मिलने के साथ ही धार्मिक और हेरिटेज पर्यटन को भी बड़ा बढ़ावा मिल सकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा