विधानसभा में आशिष बनर्जी की मौत पर शोक, ‘आखिरी नोट’ और राजनीतिक दबाव का उठा मुद्दा
कोलकाता, 10 सितंबर (हि. स.)। पश्चिम बंगाल विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष, पूर्व मंत्री और शिक्षाविद डॉ. आशिष कुमार बनर्जी के आकस्मिक निधन पर गुरुवार को विधानसभा में शोक प्रस्ताव पारित किया गया। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने उनके साथ अपने लंबे संबंधों और कार्यकाल के अनुभव साझा किए। चर्चा के दौरान उनके द्वारा छोड़े गए ‘आखिरी नोट’, राजनीतिक दबाव और उनकी असामान्य मौत को लेकर उठे सवालों का भी उल्लेख किया गया।
रामपुरहाट विधानसभा क्षेत्र से लगातार पांच बार तृणमूल कांग्रेस के विधायक रहे आशिष बनर्जी का 16 अगस्त को 75 वर्ष की आयु में निधन हुआ था। वर्ष 2021 में उन्हें विधानसभा का उपाध्यक्ष चुना गया था। रामपुरहाट कॉलेज के बंगला विभाग के पूर्व सहयोगी प्रोफेसर के रूप में उनकी पहचान एक विनम्र, मृदुभाषी और विद्वान व्यक्ति के रूप में थी।
मंत्री तापस राय ने अपने संबोधन में आशिस बनर्जी के साथ करीब साढ़े चार दशक पुराने संबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विधायक बनने से पहले से ही आशिस बनर्जी से उनका परिचय था और बाद में विधानसभा में भी साथ काम करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि आशिष बेहद विनम्र, भद्र, मृदुभाषी और सज्जन व्यक्ति थे। किसी समिति या सरकार में किसी जिम्मेदारी पर रहने के कारण किसी व्यक्ति को अपराधी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, वह आशिष बनर्जी को जितना जानते थे, वे सच्चरित्र और अच्छे इंसान थे।
विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने आशिष बनर्जी के साथ हुई अपनी आखिरी फोन बातचीत का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 14 अगस्त की शाम आशिस ने उन्हें फोन किया था। शुरुआती करीब दो मिनट राजनीतिक विषय पर बातचीत हुई, लेकिन इसके बाद दोनों के बीच किताबों और अन्य विषयों पर चर्चा हुई। ऋतब्रत ने आशिस द्वारा छोड़े गए अंतिम नोट का उल्लेख करते हुए कहा कि उसमें अन्याय देखने के बावजूद चुप रहने और साहस नहीं दिखा पाने की बात लिखी गई थी। उन्होंने जीवनानंद दास की कविता की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी।
बालीगंज के विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने भी आशिस बनर्जी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इतने लंबे परिचय के बावजूद उन्हें कभी आशिष के बारे में किसी आपराधिक या अनैतिक आचरण की जानकारी नहीं मिली। उन्होंने कहा कि मीडिया के जरिए उन्हें जानकारी मिली कि निधन से एक दिन पहले किसी ने आशिष को धमकी दी थी, लेकिन वह स्वयं धमकी की प्रकृति या इस दावे की पुष्टि नहीं कर सकते। हालांकि, उन्होंने कहा कि मौत को लेकर उठे सवालों की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है।
परिषदीय और संसदीय कार्य मंत्री शंकर घोष ने भी आशिष बनर्जी के साथ काम करने के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि पिछले विधानसभा कार्यकाल में आशिष को उपाध्यक्ष के पद पर देखा था और प्रिविलेज कमेटी के अध्यक्ष के तौर पर भी उनके साथ काम करने का अवसर मिला। उनके अनुसार, आशिष का व्यवहार, बातचीत और रुचियां उस समय के राजनीतिक माहौल से अलग और विशिष्ट थीं। उन्होंने आशिस के उन बयानों का भी उल्लेख किया, जिनमें अन्याय होते देखने के बावजूद परिस्थितियों के कारण चुप रहने की बात सामने आई थी। शंकर घोष ने कहा कि उनकी आकस्मिक मौत ने राजनीति के सामने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सभी को प्रयास करना चाहिए।
आईएसएफ विधायक नौशाद सिद्दीकी ने आशिष बनर्जी के राजनीतिक आचरण की सराहना करते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद उनके साथ विभिन्न मुद्दों पर बातचीत होती थी। उन्होंने कहा कि आशिष प्रचार की रोशनी से दूर रहना पसंद करते थे और अपने स्वभाव में काफी संकोची थे। उन्होंने उनकी असामान्य मौत को लेकर उठे सवालों की निष्पक्ष जांच की मांग भी की।
शोक प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विधायकों ने आशिस बनर्जी की राजनीतिक भूमिका के साथ उनके शिक्षक और एक भद्र व्यक्ति के रूप में योगदान को याद किया। अंत में विधानसभा के सभी सदस्यों ने एक मिनट का मौन रखकर दिवंगत पूर्व विधायक और शिक्षाविद को श्रद्धांजलि दी।
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हिन्दुस्थान समाचार / गंगा

