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विस चुनाव 2026 : आसनसोल दक्षिण सीट पर तृणमूल और भाजपा में सीधा मुकाबला

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आसनसोल, 18 मार्च (हि. स.)। पश्चिम बर्दवान जिले की नौ विधानसभा सीट पर एक बार फिर सत्तारूढ तृणमूल और मुख्य विपक्षी भाजपा के बीच सीधा मुकाबला होने की संभावना है। वर्ष 2008 में परिसीमन आयोग की सिफारिशों के बाद इस सीट का गठन हुआ। इसके तहत पुराने आसनसोल विधानसभा क्षेत्र को दो हिस्सों- आसनसोल दक्षिण और आसनसोल उत्तर में विभाजित किया गया।

यह क्षेत्र आसनसोल नगर निगम के 22 वार्डों और रानीगंज सामुदायिक विकास खंड की पांच ग्राम पंचायतों से मिलकर बना है। यहां केवल 5.55 प्रतिशत ग्रामीण मतदाता हैं। इसलिए यह पूरी तरह शहरी क्षेत्र माना जाता है।

अब तक इस सीट पर चार विधानसभा चुनाव हुए हैं। 2011 और 2016, में तृणमूल नेता तापस बनर्जी ने यहां से जीत हासिल की थी। 2021 में पहली बार भाजपा उम्मीदवार अग्निमित्रा पाल ने तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार सायनी घोष को हराकर

जीत दर्ज की। इससे पहले तृणमूल नेता तापस बनर्जी ने लगातार दो बार माकपा उम्मीदवारों को पराजित किया था। उन्होंने 2011 में माकपा नेता आलोक कुमार मुखर्जी को 28 हजार 541 वोटों से हराया, जबकि 2016 में माकपा नेता हेमंत प्रभाकर को 14 हजार 283 वोटों से मात दी थी।

हालांकि, 2021 में तृणमूल कांग्रेस ने रणनीति बदलते हुए तापस बनर्जी को रानीगंज से चुनाव लड़ाया और आसनसोल दक्षिण से फिल्म अभिनेत्री सायनी घोष को मैदान में उतारा। यह फैसला पार्टी के लिए उल्टा पड़ गया और भाजपा की उम्मीदवार तथा फैशन डिजाइनर अग्निमित्रा पॉल ने 4,487 वोटों से जीत दर्ज की। यह भाजपा की इस सीट पर पहली विजय थी।

भाजपा की जीत केवल 2021 तक सीमित नहीं रही। पार्टी लगातार इस क्षेत्र में अपनी जड़ें मजबूत करती रही है। 2014 लोकसभा चुनाव में भाजपा ने आसनसोल दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में 21,062 वोटों की बढ़त बनाई थी। यह बढ़त 2019 में बढ़कर 53,820 हो गई, जबकि 2024 के संसदीय चुनाव में बढत घटकर 12,157 पर आ गयी। इन आंकड़ों से साफ है कि भाजपा का आधार खासतौर पर हिंदी भाषी मतदाताओं के बीच लगातार बढ़ रहा है। इस क्षेत्र में हिंदी भाषी मतदाता, जिनकी जड़ें मुख्य रूप से बिहार और झारखंड से जुड़ी हैं, कुल मतदाताओं का लगभग 35 से 40 प्रतिशत तक हो सकते हैं।

2021 के विधानसभा चुनावों में आसनसोल दक्षिण में 2,74,245 पंजीकृत मतदाता थे। यह संख्या 2019 में 2,58,223 और 2016 में 2,47,366 थी।

यहां मुस्लिम मतदाता लगभग 12.30 प्रतिशत हैं, जबकि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की हिस्सेदारी क्रमशः 20.56 प्रतिशत और 6.50 प्रतिशत है। मतदान प्रतिशत की बात करें तो वर्ष 2021 में 74.01 प्रतिशत, 2019 में 75.48 प्रतिशत और 2016 में 75.08 प्रतिशत मतदान हुआ।

इस बार के विधानसभा चुनाव में भी आसनसोल दक्षिण में फिर से कड़ा मुकाबला होने की संभावना है। भाजपा, जो अपने प्रवासी मतदाताओं के समर्थन और हाल की जीत से उत्साहित है, सीट को बरकरार रखना चाहेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा