हत्या के प्रयास के मामले में पूर्व मंत्री अरूप विश्वास को कलकत्ता हाई कोर्ट से अंतरिम राहत, सीसीटीवी संरक्षित करने का आदेश
कोलकाता, 08 जुलाई (हि. स.)। पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री अरूप विश्वास को अलीपुर अदालत परिसर में एक अधिवक्ता पर कथित हमले और हत्या के प्रयास के मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट से अंतरिम राहत मिल गई है। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने बुधवार को सुनवाई के दौरान निर्देश दिया कि अरूप विश्वास के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई करने से पहले जांच एजेंसी को अदालत को सूचित करना होगा। मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी।
सुनवाई के दौरान अरूप विश्वास की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता किशोर दत्ता ने राज्य में हाल के घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए अदालत से कहा कि पुलिस की मौजूदगी में आरोपितों पर हमले हो रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब लोग पहले से हिरासत में हैं तो उनके साथ इस तरह की हिंसा क्यों हो रही है। उन्होंने हाल के कुछ मामलों का भी हवाला देते हुए न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि आरोपितों की कमर में रस्सी बांधकर सार्वजनिक रूप से घुमाना उचित नहीं है और ऐसी प्रथा बंद होनी चाहिए। अदालत ने जांच एजेंसी को घटना वाले दिन के सभी सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का भी निर्देश दिया, ताकि जांच के दौरान इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सुरक्षित रह सकें।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले 10 जून को भी कलकत्ता हाई कोर्ट ने चर्चित मेसी प्रकरण से जुड़े एक मामले में अरूप विश्वास को अंतरिम संरक्षण प्रदान किया था।
यह मामला 26 जून को अलीपुर अदालत के अधिवक्ता निर्मलेंदु कुमार घोष द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा है। निर्मलेंदु घोष ने अलीपुर थाने में दर्ज एफआईआर में अरूप विश्वास, उनके समर्थकों और सहयोगियों पर शारीरिक हमला, मारपीट तथा हत्या के प्रयास का आरोप लगाया है।
शिकायत के अनुसार, घटना 18 जून को अलीपुर अदालत परिसर में हुई थी। उस दिन अरूप विश्वास के भाई स्वरूप विश्वास को धोखाधड़ी, रंगदारी और यौन उत्पीड़न से जुड़े एक मामले में अदालत में पेश किया गया था। निर्मलेंदु घोष का दावा है कि वह उस मामले में शिकायतकर्ता पक्ष के अधिवक्ताओं का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।
एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि अदालत परिसर में अरूप विश्वास के समर्थकों और कुछ असामाजिक तत्वों की मौजूदगी थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, सुबह से ही उन्हें और अन्य अधिवक्ताओं को निशाना बनाकर अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया तथा लगातार उकसाया गया। बाद में उनके साथ मारपीट की गई।
निर्मलेंदु घोष ने आरोप लगाया कि हमले के दौरान आत्मरक्षा करने की कोशिश में उनके दाहिने हाथ के अंगूठे में गंभीर चोट लगी। इसके अलावा उनकी पीठ और दाहिने कंधे पर भी चोटें आईं। उन्होंने बताया कि सहकर्मी अधिवक्ताओं की मदद से वह किसी तरह वहां से निकले और बाद में एसएसकेएम अस्पताल जाकर उपचार कराया।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। अदालत परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज की भी जांच की जाएगी ताकि घटना की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाया जा सके।
गौरतलब है कि 19 जून को अलीपुर अदालत परिसर में अरूप विश्वास को लेकर अधिवक्ताओं के एक वर्ग के विरोध-प्रदर्शन और तनाव की घटना सामने आई थी। उसी घटनाक्रम के बाद इस मामले में आपराधिक शिकायत दर्ज कराई गई।
अब कलकत्ता हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद जांच एजेंसी अदालत की अनुमति या सूचना के बिना अरूप विश्वास के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं कर सकेगी। मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी, जहां अदालत जांच की प्रगति और अन्य पहलुओं पर विचार करेगी।
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

