आपदा से निपटने के लिए बंगाल में ‘अर्जुन वाहिनी', सेवानिवृत्त सैनिकों को मिलेगी प्राथमिकता
कोलकाता, 1 सितंबर (हि.स.)। पश्चिम बंगाल में बाढ़, भूस्खलन, मकान ढहने और अन्य प्राकृतिक या मानवजनित आपदाओं से निपटने के लिए राज्य सरकार विशेष बल ‘अर्जुन’ का गठन करेगी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मंगलवार को कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम में इस विशेष बल की घोषणा की। इसमें मुख्य रूप से सेवानिवृत्त सैनिकों और आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण प्राप्त लोगों को शामिल किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में आपदा प्रबंधन के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण और आधुनिक उपकरणों की कमी है। उन्होंने अम्फान के बाद की स्थिति तथा तारातला हादसे का उल्लेख करते हुए कहा कि आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने निर्माण कार्यों में नियमों की अनदेखी को लेकर भी चिंता जताई और माझेरहाट तथा पोस्ता फ्लाईओवर के ढहने जैसी घटनाओं का उल्लेख किया।
प्रारंभिक चरण में ‘अर्जुन’ बल में 200 सदस्य होंगे। इनमें 100 कोलकाता, 50 पहाड़ी क्षेत्र और 50 सुंदरबन इलाके में तैनात किए जाएंगे। आने वाले समय में राज्य के प्रमुख पर्यटन केंद्रों पर भी ‘अर्जुन’ की इकाइयां तैनात करने की योजना है। दार्जिलिंग, काकद्वीप, दीघा और कोलकाता में आपदा प्रबंधन से जुड़ा आवश्यक ढांचा विकसित किया जाएगा।
‘अर्जुन’ में शामिल सदस्यों को दो श्रेणियों में रखा जाएगा। सामान्य सदस्यों को ‘वीर’ और टीम का नेतृत्व करने वाले सदस्य को ‘वीरनायक’ कहा जाएगा। ‘वीर’ को हर महीने 25 हजार रुपये और ‘वीरनायक’ को 40 हजार रुपये का मानदेय दिया जाएगा। इसमें हर वर्ष तीन प्रतिशत की वृद्धि का प्रावधान होगा।
बल के सदस्यों को समूह बीमा की सुविधा भी मिलेगी। गंभीर दुर्घटना या मृत्यु की स्थिति में 10 लाख रुपये तक का बीमा कवर और स्थायी अक्षमता की स्थिति में 5 लाख रुपये तक का बीमा कवर उपलब्ध कराया जाएगा।
मुख्यमंत्री के अनुसार, फिलहाल राज्य सैनिक बोर्ड के माध्यम से 40 वर्ष तक की आयु वाले पात्र लोगों को ‘अर्जुन’ में शामिल किया जा रहा है। नागरिक सुरक्षा का प्रशिक्षण प्राप्त लोगों की सेवाओं का भी इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनवरी में अग्निवीरों की पहली खेप आने के बाद उन्हें भी इस बल में शामिल करने की व्यवस्था की जाएगी।
राज्य सरकार भविष्य में ‘अर्जुन’ में भर्ती के लिए अग्निवीरों और सेवानिवृत्त सैनिकों को विशेष प्राथमिकता देने की योजना बना रही है। सरकार का उद्देश्य ऐसे प्रशिक्षित और अनुशासित मानव संसाधन को आपदा प्रबंधन से जोड़ना है, जो आपात स्थिति में तेजी से राहत और बचाव कार्य कर सके।
‘अर्जुन’ बल का मुख्य उद्देश्य किसी भी आपदा के दौरान तत्काल राहत और बचाव अभियान चलाना होगा। बाढ़, भूस्खलन, इमारत या अन्य ढांचे के ढहने तथा विभिन्न आपात स्थितियों में प्रशिक्षित दल को मौके पर भेजकर बचाव कार्य को गति देने की योजना है।
राज्य सरकार के मुताबिक, ‘अर्जुन’ के गठन के साथ आपदा प्रबंधन व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से मजबूत किया जाएगा। भविष्य में इसके दायरे और तैनाती का विस्तार कर राज्य के संवेदनशील इलाकों में स्थानीय स्तर पर तेज प्रतिक्रिया तंत्र तैयार करने पर भी जोर दिया जाएगा।
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

