बांग्लादेश सीमा पर कंटीले तार लगाने को मंजूरी, सीमावर्ती इलाकों में उम्मीद के साथ आशंकाएं भी
सिलीगुड़ी,13 मई (हि.स.)। राज्य मंत्रिमंडल की पहली कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर कंटीले तार (फेंसिंग) के लिए जमीन हस्तांतरण प्रक्रिया शुरू करने को मंजूरी दे दी है। इसके बाद सिलीगुड़ी महकमा के फांसीदेवा के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों के बीच घुसपैठ और तस्करी रुकने की उम्मीद जगी है, हालांकि कुछ लोग संभावित विस्थापन को लेकर चिंतित भी हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि फेंसिंग के लिए जमीन देने की प्रक्रिया में कई परिवारों को हटना पड़ सकता है। लंबे समय से पुनर्वास की मांग कर रहे सदर बाजार और धनिया मोड़ इलाके के लोग अब सरकार के फैसले पर नजर बनाए हुए हैं।
इस मामले में दार्जिलिंग के जिलाधिकारी हरिशंकर पनिक्कर ने आश्वासन दिया कि किसी भारतीय नागरिक को परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
फूलबाड़ी के पास लालदासजोत से हप्तियागछ तक करीब 21 किलोमीटर लंबी इंडो- बांग्लादेश बॉर्डर का हिस्सा फांसीदेवा ब्लॉक में आता है, जिसमें लगभग साढ़े चार किलोमीटर क्षेत्र अभी भी खुला हुआ है। धनिया मोड़ में करीब ढाई किलोमीटर खुले क्षेत्र में 2024 अगस्त से अस्थायी फेंसिंग शुरू हुई थी, जबकि मुड़िखावा इलाके में भी जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है।
इस क्षेत्र में लंबे समय से मवेशी तस्करी की शिकायतें आती रही हैं। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने भी माना कि जमीन से जुड़ी जटिलताओं के कारण काम धीमा पड़ा था, लेकिन अब समाधान की उम्मीद है।
कैबिनेट बैठक में अगले 45 दिनों के भीतर बीएसएफ को जरूरी जमीन सौंपने का निर्देश दिया गया है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि फेंसिंग न होने के कारण फसलें अक्सर सीमा पार से आने वाले असामाजिक तत्वों द्वारा नष्ट कर दी जाती थी। अस्थायी कंटीले तार लगने के बाद स्थिति में सुधार हुआ है, और स्थायी फेंसिंग से सुरक्षा और मजबूत होगी।
हालांकि, इस इलाके में तस्करी रोकने के दौरान कई हिंसक घटनाएं भी सामने आई है।
पिछले कुछ वर्षों में बीएसएफ की कार्रवाई में कई लोगों की मौत और घायल होने की घटनाएं हुई है। ऐसे में कई ग्रामीणों का मानना है कि फेंसिंग से न सिर्फ तस्करी रुकेगी, बल्कि जान-माल का नुकसान भी कम होगा।
वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि उनकी जमीन अधिग्रहित होगी, लेकिन अगर इससे सुरक्षा बढ़ती है और मौतों पर रोक लगती है, तो वे इसके लिए तैयार हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / सचिन कुमार

