अन्नपूर्णा भंडार फॉर्म को लेकर सियासत तेज, आवेदन प्रक्रिया जटिल बनाने के आरोपों को भाजपा ने किया खारिज
पश्चिम बर्दवान, 30 मई (हि.स.)।
पश्चिम बंगाल की प्रस्तावित अन्नपूर्णा भंडार योजना को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार गहराता जा रहा है। योजना के आवेदन फॉर्म को लेकर विपक्षी पार्टियां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर हमलावर हो रही हैं। वहीं सत्ता पक्ष विपक्ष की तरफ से व्यक्त की जा रही तमाम आशंकाओं को आधारहीन बता रही है।
विपक्ष ने दावा किया है कि अन्नपूर्णा भंडार का फॉर्म पहले 12 पन्नों का था, जिसे अब बढ़ाकर 13 पन्नों का कर दिया गया है। इसे लेकर विपक्ष ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है।
विपक्षी नेताओं का आरोप है कि भाजपा एक ओर योजना प्रक्रिया को सरल बनाने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर आवेदन प्रक्रिया को और अधिक जटिल बनाया जा रहा है।
विपक्षी नेताओं ने कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि इसी तरह “सरलीकरण” जारी रहा तो लोगों को फिर से “हर खाते में 15 लाख रुपये” जैसे पुराने वादों की याद दिलानी पड़ेगी। उनका कहना है कि “ज्यादा कागज, ज्यादा वादे और कम डिलीवरी” ही डबल इंजन मॉडल की वास्तविक तस्वीर बनती जा रही है।
विपक्ष का आरोप है कि अधिक पन्नों वाले फॉर्म, अतिरिक्त दस्तावेजों की मांग और लंबी प्रक्रियाएं आम लोगों, विशेषकर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए परेशानी का कारण बन सकती हैं।
वहीं भाजपा नेता और राज्य की नगर विकास मंत्री अग्निमित्रा पाल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि केवल फॉर्म के पन्नों की संख्या देखकर लोगों में भय पैदा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार और संबंधित विभाग आवेदन प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं तथा लोगों को 12 या 13 पन्नों का फॉर्म देखकर घबराने की आवश्यकता नहीं है।
अग्निमित्रा पाल ने स्पष्ट किया कि सरकार विभिन्न योजनाओं के लिए आवश्यक आंकड़ों का संग्रह कर रही है और इसी कारण कुछ अतिरिक्त जानकारियां मांगी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि इस डेटा संग्रह का अन्नपूर्णा भंडार योजना से सीधे तौर पर कोई संबंध नहीं है और ऐसा नहीं है कि डेटा जमा करने के बाद ही योजना का लाभ मिलेगा।
उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि योजना का लाभ केवल वास्तविक और पात्र लोगों तक पहुंचे। इसी उद्देश्य से कुछ जानकारियों का सत्यापन किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जो व्यक्ति आयकर देता है, उसे अन्नपूर्णा भंडार जैसी जनकल्याणकारी योजना का लाभ क्यों लेना चाहिए, क्योंकि यह जनता का पैसा है और इसका उपयोग जरूरतमंद लोगों के लिए होना चाहिए।
अग्निमित्रा पाल ने कहा कि भाजपा भी नहीं चाहती कि अपात्र लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिले। उनका कहना था कि जनता के पैसे से चलने वाली योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचना चाहिए, ताकि सरकारी सहायता का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके।
अन्नपूर्णा भंडार योजना को लेकर जारी यह राजनीतिक बहस आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है। फिलहाल विपक्ष जहां आवेदन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं भाजपा इसे पारदर्शिता और पात्र लाभार्थियों की पहचान सुनिश्चित करने की प्रक्रिया बता रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा

