अनुव्रत मंडल पर हमले को लेकर सियासी घमासान, भाजपा और तृणमूल आमने-सामने
वीरभूम, 01 अक्टूबर (हि. स.)। अनुव्रत मंडल पर हमले को लेकर तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गया है। तृणमूल की ओर से आरोप लगाया गया कि हमलावर भाजपा समर्थित बदमाश थे। तृणमूल नेता ने कहा कि उनके नेता अनुव्रत मंडल पर जिस तरह हमला हुआ, उसकी निंदा के लिए शब्द नहीं हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में सरकार बदलने के बाद मुख्यमंत्री बार-बार कानून का शासन स्थापित होने की बात कहती रही हैं, लेकिन आज की घटना से लगता है कि शासक दल शासन का कानून स्थापित करना चाहता है।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक माहौल में यदि विपक्ष की यह स्थिति है, तो गंभीर चिंता का विषय है। अनुव्रत मंडल उनकी पार्टी के वरिष्ठ राजनेता भी हैं। इस मामले को लेकर प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है।
दूसरी ओर, बीरभूम के तृणमूल नेता काजल शेख ने घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा, ‘‘देखने से लगता है कि यह घटना सजाई गई है।’’ हालांकि अनुव्रत मंडल के साथ काजल शेख के संबंध मधुर बताए जाते हैं।
लगातार कई दिनों से अनुव्रत मंडल पर हो रहे हमले की घटनाओं का जिक्र करते हुए तृणमूल विधायक कुणाल घोष ने भी राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं केवल समाज के लिए ही नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था के लिए भी नुकसानदेह हैं।
बेलियाघाटा के विधायक कुणाल घोष ने भाजपा पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कुछ देर बाद संभव है कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य का बयान आए कि इस हमले में शामिल लोगों से भाजपा का कोई संबंध नहीं है।
भाजपा विधायक ध्रुव साहा ने पलटवार करते हुए कहा कि कुछ दिन पहले अनुव्रत मंडल ने कहा था, ‘‘वह फुटानी क्या अब मेरे पास है!’’ उन्होंने कहा कि असली ताकत जनता के हाथ में होती है। उनके अनुसार, जिन लोगों पर अनुव्रत मंडल के दौर में अत्याचार और अपमान हुआ, वे आज ऐसी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस तरह की घटना किसी भी तरह वांछनीय नहीं है। उन्होंने लोगों से कानून पर भरोसा रखने की अपील करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में कानून का शासन चल रहा है और ऐसी घटनाओं को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा

