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अंडाल में फिर धंसी जमीन, इलाके में दहशत

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अंडाल में फिर धंसी जमीन, इलाके में दहशत


पश्चिम बर्दवान, 26 सितंबर (हि.स.)।

पश्चिम बर्दवान जिले के अंडाल के खान्दरा स्थित नीलकंठ मंदिर इलाके में एक बार फिर जमीन धंसने की घटना से दहशत फैल गई है। शुक्रवार रात नीलकंठ मंदिर से कुछ दूरी पर खाली जगह पर बड़े पैमाने पर जमीन धंसने से वहां गहरा गड्ढा बन गया। घटना के बाद स्थानीय लोगों में फिर से भय का माहौल है।

बताया जा रहा है कि करीब एक महीने के भीतर इसी इलाके में यह दूसरी बार जमीन धंसने की घटना है। इससे पहले आबादी वाले क्षेत्र के बेहद करीब जमीन धंसने के बाद स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई थी और कई लोगों को अपने घरों से बाहर निकलना पड़ा था। उस समय रानीगंज के विधायक पार्थ घोष भी मौके पर पहुंचे थे और स्थानीय लोगों के साथ खड़े रहने का आश्वासन दिया था। इसके बाद ईसीएल की ओर से धंसाव वाले क्षेत्र को खतरनाक चिन्हित कर वहां घेराबंदी की गई थी। हालांकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि अब तक स्थायी सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई है।

घटना को लेकर खांद्रा गांव के निवासी आकाश रुईदास ने विश्वेश्वरी कोलियरी के तत्कालीन प्रबंधक विश्वजीत राय पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका आरोप है कि गांव और नीलकंठ मंदिर के आसपास बार-बार हो रहे धसान की वजह खदान के नीचे सही तरीके से बालू भराई और पैकिंग नहीं होना है। उन्होंने खदान प्रबंधन और ठेकेदारों के बीच मिलीभगत का भी आरोप लगाया है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले हुए धंसाव के बाद ईसीएल अधिकारियों ने वर्ष 1982 की पुरानी खदान को जमीन धंसने का कारण बताया था। हालांकि स्थानीय निवासी इस दावे से सहमत नहीं हैं। उनका आरोप है कि वर्तमान में भी खदान के नीचे कोयला निकालने के बाद पर्याप्त और सही तरीके से बालू भराई नहीं की जा रही है, जिसके कारण बार-बार जमीन धंसने की घटनाएं हो रही हैं।

इधर शुक्रवार रात की घटना की जानकारी मिलने के बाद शनिवार सुबह ईसीएल के कुछ अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। हालांकि अधिकारियों ने कैमरे के सामने इस मामले में कोई बयान देने से इनकार कर दिया। लगातार हो रही जमीन धंसने की घटनाओं के कारण स्थानीय लोगों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। अब लोगों की मांग है कि इलाके में स्थायी सुरक्षा व्यवस्था की जाए और जमीन धंसने के वास्तविक कारण की जांच कर आवश्यक कदम उठाए जाएं।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा