आनंदपुर अग्निकांड पर सियासत तेज, अमित मालवीय और बंगाल भाजपा का आरोप— यह हादसा नहीं, सरकार-निर्मित आपदा
कोलकाता, 21 फ़रवरी (हि. स.)। आनंदपुर इलाके में हुए भीषण अग्निकांड, जिसमें 27 से अधिक लोगों की जान चली गई, को लेकर राज्य की राजनीति में तीखी बयानबाज़ी शुरू हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और पार्टी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने इस घटना को “दुर्घटना नहीं, बल्कि सरकार-निर्मित आपदा” करार दिया है। शनिवार को एक्स हैंडल पर किए गए पोस्ट में उन्होंने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया।
अमित मालवीय ने अपने पोस्ट में दावा किया कि वर्ष 2023 में एक पर्यावरण कार्यकर्ता ने ईस्ट कोलकाता वेटलैंड्स में अवैध भराई और निर्माण को लेकर याचिका दायर की थी। यह इलाका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त रामसर साइट है। मामले की सुनवाई के बाद राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने एक जांच समिति गठित की थी, जिसकी रिपोर्ट में 600 से अधिक अवैध निर्माण होने की बात सामने आई थी। एनजीटी ने इन अवैध ढांचों को ध्वस्त करने का आदेश दिया, लेकिन आरोप है कि राज्य सरकार और संबंधित विभागों ने कोई कार्रवाई नहीं की।
उन्होंने आगे कहा कि वर्ष 2025 में नजीराबाद इलाके (जहां 2026 में यह अग्निकांड हुआ) में अवैध निर्माण को लेकर एक और शिकायत एनजीटी के पास पहुंची। इस पर एनजीटी ने स्वतः संज्ञान लेते हुए एक तथ्य-जांच समिति बनाई, जिसने फिर से अवैध निर्माण की पुष्टि की। इसके बावजूद एनजीटी द्वारा ईस्ट कोलकाता वेटलैंड्स से सभी अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए जाने के बाद भी राज्य सरकार की ओर से न तो कोई ठोस कदम उठाया गया और न ही कोई ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ दाखिल की गई।
इसी पृष्ठभूमि में अमित मालवीय ने सवाल उठाया कि जब बार-बार चेतावनी दी गई, तब भी अवैध निर्माणों को क्यों संरक्षण दिया गया। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि चेतावनियों को नजरअंदाज किया गया, अतिक्रमण को बचाया गया और अंततः निर्दोष लोगों की जान चली गई। उन्होंने इसे “आपराधिक लापरवाही” बताया और आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के “हाथों पर खून है।”
इसी तरह बंगाल भाजपा ने भी शनिवार को एक्स हैंडल पर पोस्ट करते हुए कहा कि आनंदपुर अग्निकांड कोई हादसा नहीं, बल्कि सरकार की विफलता का नतीजा है। पार्टी ने दोहराया कि एनजीटी के निर्देशों का पालन नहीं किया गया और सरकारी निष्क्रियता के कारण यह त्रासदी हुई।
हालांकि, इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक राज्य सरकार या तृणमूल कांग्रेस की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय

