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महिशिला कॉलोनी के शिमूलतल्ला दुर्गापूजा मंडप में मंत्री अग्निमित्रा पाल ने बजाया ढाक

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महिशिला कॉलोनी के शिमूलतल्ला दुर्गापूजा मंडप में मंत्री अग्निमित्रा पाल ने बजाया ढाक


आसनसोल, 17 अक्टूबर (हि.स.)।

शारदीय दुर्गोत्सव के उल्लास के बीच आसनसोल के महिशिला कॉलोनी स्थित शिमूलतल्ला दुर्गापूजा मंडप में शुक्रवार की रात उत्सव का खास रंग देखने को मिला। पश्चिम बंगाल सरकार की नगर विकास मंत्री एवं आसनसोल दक्षिण की विधायक अग्निमित्रा पाल ने पूजा मंडप के उद्घाटन समारोह में पहुंचकर स्वयं ढाक बजाया। ढाक की थाप के बीच मंत्री के इस पारंपरिक अंदाज ने उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया और समारोह का उत्साह बढ़ा दिया।

शिमूलतल्ला दुर्गापूजा मंडप के उद्घाटन के दौरान माहौल भक्तिमय और उत्साहपूर्ण रहा। इसी बीच अग्निमित्रा पाल ढाक बजाने वाले कलाकारों के पास पहुंचीं और उनके साथ ढाक बजाकर दुर्गोत्सव की खुशियों में शामिल हुईं। उनका यह अंदाज बंगाल की समृद्ध लोकसंस्कृति और दुर्गापूजा की पारंपरिक विरासत से जुड़ाव का प्रतीक बना।

मंत्री ने बताया कि दुर्गापूजा के अवसर पर वह स्वयं भी ढाक बजाती हैं और पारंपरिक उलूध्वनि करके उत्सव मनाती हैं। बंगाल में उलूध्वनि को शुभ अवसरों पर मंगलकामना और उल्लास की अभिव्यक्ति माना जाता है। ढाक की थाप, शंखध्वनि और उलूध्वनि मिलकर दुर्गोत्सव के वातावरण को विशिष्ट पहचान देते हैं।

पश्चिम बंगाल में दुर्गापूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि कला, संस्कृति और सामाजिक एकजुटता का भी महत्वपूर्ण पर्व है। पूजा के दौरान ढाक की गूंज मां दुर्गा के स्वागत से लेकर विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों तक उत्सव का अभिन्न हिस्सा बनी रहती है। ढाक बजाने वाले कलाकार अपनी पारंपरिक कला और विशिष्ट ताल के माध्यम से पूजा मंडपों की रौनक बढ़ाते हैं।

प्रतिमा निर्माण करने वाले कारीगरों, पंडाल सजाने वाले शिल्पकारों और ढाक बजाने वाले कलाकारों की मेहनत से दुर्गोत्सव को भव्य स्वरूप मिलता है। ऐसे में कलाकारों के बीच पहुंचकर ढाक बजाने की मंत्री की पहल ने लोककलाकारों और बंगाल की सांस्कृतिक परंपरा के महत्व को भी रेखांकित किया।

आसनसोल के महिषिला कॉलोनी स्थित शिमूलतल्ला दुर्गापूजा मंडप में उद्घाटन समारोह के साथ ही दुर्गोत्सव का उत्साह और बढ़ गया। क्षेत्र की पूजा समितियां मंडपों को आकर्षक रूप देने और श्रद्धालुओं के स्वागत की तैयारियों में जुटी हैं। पूजा मंडपों में होने वाले ऐसे आयोजन स्थानीय लोगों को एक साथ लाने के साथ नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का अवसर भी प्रदान करते हैं।

शिमूलतल्ला दुर्गापूजा मंडप में अग्निमित्रा पाल का ढाक बजाना समारोह का खास आकर्षण रहा। पारंपरिक वाद्य की गूंज के बीच उनके इस अंदाज ने दुर्गोत्सव की सांस्कृतिक छटा को और जीवंत बना दिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा