ममता के ‘बाघ’ वाले बयान पर मंत्री अग्निमित्रा पाल का तंज, कहा : अभिषेक को जंगल छोड़ना चाहिए
पश्चिम बर्दवान, 16 जुलाई (हि. स.)। पश्चिम बंगाल की शहरी विकास एवं नगर मामलों की मंत्री अग्निमित्रा पाल ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा तृणमूल सांसद अभिषेक बनर्जी को बाघ की तरह लड़ने वाला बताए जाने वाले बयान पर तीखा हमला बोला। आसनसोल में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की तुलना जंगल से करते हुए कहा कि पार्टी के भीतर अब बाघों की लड़ाई चल रही है और जनता की सुरक्षा के लिए ऐसे बाघों को पिंजरे में बंद कर देना चाहिए या फिर जंगल में छोड़ देना चाहिए। गुरुवार को अग्निमित्रा पाल ने नेताजी स्पोर्टिंग क्लब के खुंटी पूजा के दौरान उक्त बातें कहीं। उसके बाद बर्नपुर स्थित जगन्नाथ मंदिर से भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का शुभारंभ किया। उन्होंने भगवान के चरणों में श्रद्धा अर्पित करते हुए पारंपरिक स्वर्ण झाड़ू से मार्ग की सफाई की और रथ की रस्सी खींचकर यात्रा का शुभारंभ किया। रथयात्रा के दौरान भजन-कीर्तन के बीच मंत्री भी श्रद्धालुओं के साथ भक्ति में लीन नजर आईं।
अग्निमित्रा पाल ने कहा कि मुख्यमंत्री आखिर किस बाघ की बात कर रही हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राज्य में अब हर तरफ बाघ ही बाघ दिखाई दे रहे हैं। उनका कहना था कि अगर अभिषेक बनर्जी इसी तरह आगे बढ़ते रहे तो उन्हें जंगल में छोड़ आना पड़ेगा, क्योंकि सभ्य समाज में ऐसे बाघों के लिए कोई जगह नहीं है।
उन्होंने तृणमूल कांग्रेस में चल रहे अंदरूनी विवाद का भी जिक्र करते हुए कहा कि पिछले कुछ दिनों में पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने नेतृत्व के खिलाफ खुलकर नाराजगी जताई है। यह स्थिति बताती है कि पार्टी के भीतर संघर्ष लगातार बढ़ रहा है।
मंत्री ने आरोप लगाया कि पिछले 15 वर्षों में तृणमूल के नेताओं ने राज्य के लोगों को नुकसान पहुंचाया है और अब पार्टी के भीतर ही टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि ऐसे बाघों की जगह सुंदरबन या गुजरात के गिर जंगल में है, न कि सभ्य समाज में।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा

