सरकारी जिला अस्पताल में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी - अग्निमित्रा पाल
पश्चिम बर्दवान, 04 जून (हि. स.)। पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री एवं भाजपा विधायक अग्निमित्रा पाल ने आसनसोल जिला अस्पताल में गुरूवार को रोगी कल्याण समिति के पदाधिकारी के साथ समीक्षा बैठक की। स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा बैठक के बाद अस्पताल प्रशासन, चिकित्सकों और कर्मचारियों को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकारी अस्पतालों में लापरवाही, अनुशासनहीनता और मरीजों के साथ दुर्व्यवहार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मंत्री ने आम जनता से अपील करते हुए कहा कि यदि किसी मरीज या उसके परिजन को अस्पताल में किसी प्रकार की असुविधा होती है, किसी डॉक्टर, नर्स या कर्मचारी द्वारा दुर्व्यवहार किया जाता है अथवा स्वास्थ्य सेवाओं में किसी प्रकार की अनियमितता दिखाई देती है, तो वे इसकी जानकारी नाम सहित उन्हें दें। इसके लिए एक सोशल मीडिया नंबर भी जारी किया जाएगा, जहां लोग अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे। उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में अस्पतालों में बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू करने पर भी चर्चा हुई। मंत्री अग्निमित्रा ने कहा कि केवल बायोमेट्रिक लगाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि कर्मचारियों और चिकित्सकों को कार्यस्थल पर निर्धारित समय तक उपस्थित रहकर जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने कहा कि सभी को जवाबदेह बनना होगा और कार्य संस्कृति में सुधार लाना होगा।
उन्होंने अस्पताल परिसर की साफ-सफाई पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि कई जगहों पर गंदगी, कचरा और इस्तेमाल किए गए बैंडेज बिखरे हुए मिले। बाथरूमों की स्थिति भी अत्यंत खराब है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अस्पताल के हर कोने को साफ-सुथरा रखा जाए, नियमित सफाई हो तथा भवनों का रंगरोगन कराया जाए।
मंत्री ने कहा कि अस्पताल में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की कमी एक गंभीर समस्या है। इस विषय पर वह स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और सचिव से चर्चा करेंगी। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल में कई महत्वपूर्ण पद रिक्त हैं, जिन्हें भरना आवश्यक है।
अस्पताल परिसर में आवारा पशुओं की मौजूदगी और टोटो चालकों की अव्यवस्था पर भी उन्होंने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि मरीजों और उनके परिजनों के साथ अभद्र व्यवहार की शिकायतें मिली हैं। अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाएगी और आवारा पशुओं को प्रवेश से रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
अग्निमित्रा पाल ने अस्पताल में रैंप की कमी को भी गंभीर विषय बताया। उन्होंने कहा कि यदि किसी आपात स्थिति या आग लगने जैसी घटना में मरीजों को व्हीलचेयर पर बाहर निकालना पड़े तो वर्तमान व्यवस्था अपर्याप्त साबित होगी। इसलिए आधारभूत ढांचे को मजबूत करना आवश्यक है।
उन्होंने कुछ चिकित्सकों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि शिकायत मिली है कि कुछ डॉक्टर सप्ताह में केवल एक-दो दिन अस्पताल आते हैं और बाकी समय निजी चैंबर चलाते हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि किसी चिकित्सक को नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस (एनपीए) मिलता है तो उसे सरकारी अस्पताल में पूरी निष्ठा से सेवा देनी होगी। सरकारी नौकरी करते हुए निजी प्रैक्टिस को प्राथमिकता देना स्वीकार्य नहीं होगा।
अस्पताल परिसर में स्थित फार्मेसी दुकानों को लेकर भी मंत्री ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि जिन दुकानों का अनुबंध समाप्त हो चुका है, उन्हें तत्काल परिसर खाली करना होगा। पुलिस को निर्देश दिया गया है कि दो दिनों के भीतर जगह खाली नहीं होने पर आवश्यक कार्रवाई की जाए ताकि नए टेंडर धारकों को दुकानें संचालित करने का अवसर मिल सके।
बैठक में ट्रॉमा सेंटर को पुनः सक्रिय करने पर भी चर्चा हुई। मंत्री ने बताया कि इस संबंध में जिलाधिकारी से बातचीत हुई है। ट्रॉमा सेंटर के कई उपकरण पहले अन्यत्र स्थानांतरित कर दिए गए थे। अब वैकल्पिक स्थान पर ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है।
उन्होंने हाल ही में एक छात्र की मृत्यु और अस्पताल में खराब एयर कंडीशनिंग व्यवस्था का भी उल्लेख करते हुए कहा कि सात-दस दिनों तक एसी खराब रहना कार्य संस्कृति की कमजोरी को दर्शाता है। संबंधित एजेंसियों और अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से समस्याओं का समाधान करना होगा।
मंत्री अग्निमित्रा पाल ने कहा कि सरकारी अस्पताल जनता के टैक्स के पैसे से चलते हैं और यहां कार्यरत प्रत्येक कर्मचारी का वेतन भी जनता के पैसे से दिया जाता है। इसलिए सभी को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ काम करना होगा।
मौके पर आसनसोल उत्तर के विधायक कृष्णेंदू मुखर्जी, आसनसोल जिला अस्पताल अधीक्षक डॉक्टर निखिलचंद दास तथा अन्य सहायक चिकित्सक और सहायक अधीक्षक मौजूद थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा

