बिहार-झारखंड के चालान पर बंगाल में बालू एंट्री को लेकर पुलिस सख्त, जीपीएस फोटो के बिना सीमा पर रोके जा रहे वाहन
पश्चिम बर्दवान, 31 अगस्त (हि. स.)। बिहार और झारखंड से वैध चालान के आधार पर पश्चिम बंगाल में प्रवेश करने वाले बालू लदे वाहनों की जांच अब और सख्त कर दी गई है। आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट की ओर से सीमा पर वाहनों के चालान की जांच के साथ-साथ बालू के वास्तविक लोडिंग पॉइंट का जीपीएस लोकेशन वाला फोटो भी मांगा जा रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार, जिन वाहन चालकों के पास वैध चालान होने के बावजूद बालू लोडिंग स्थल का जीपीएस फोटो उपलब्ध नहीं है, उन्हें फिलहाल पश्चिम बंगाल में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है। ऐसे वाहनों को सीमा पर रोककर दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
पुलिस की सख्ती के बाद पश्चिम बंगाल-झारखंड सीमा के विभिन्न इलाकों में बालू लदे वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। आसनसोल के डिबूडीह चेकपोस्ट, मैथन सीमा क्षेत्र, रूपनारायणपुर और झारखंड के मिहिजाम इलाके में वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने की खबर है।
वाहन चालकों से यह जानकारी भी मांगी जा रही है कि बालू किस घाट अथवा लोडिंग पॉइंट से उठाई गई है। पुलिस चालान में दर्ज जानकारी और वास्तविक लोडिंग स्थल के बीच किसी प्रकार का अंतर की भी जांच कर रही है।
बालू के अवैध कारोबार और संदिग्ध चालान के इस्तेमाल को लेकर समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं। आरोप हैं कि कुछ मामलों में दूसरे राज्यों के चालान का इस्तेमाल कर बालू के वास्तविक स्रोत को छिपाने की कोशिश की जाती है।
ऐसी शिकायतों के बाद पुलिस अब केवल चालान देखकर वाहनों को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दे रही है, बल्कि बालू के स्रोत का प्रमाण भी मांगा जा रहा है। हालांकि, अवैध गतिविधियों से जुड़े आरोपों की पुष्टि संबंधित मामलों की जांच के बाद हो सकेगी।
आसनसोल के रूपनारायणपुर और झारखंड के मिहिजाम थाना क्षेत्र के आसपास भी बालू लदे वाहनों की जांच बढ़ने की बात सामने आई है। जिन वाहनों के पास चालान तो है, लेकिन लोडिंग पॉइंट का जीपीएस फोटो नहीं है, उन्हें जांच पूरी होने तक आगे बढ़ने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पश्चिम बंगाल पुलिस की इस सख्ती के बाद झारखंड में भी इसी तरह की जांच व्यवस्था लागू किए जाने की चर्चा तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, जामताड़ा पुलिस भी बालू लदे वाहनों के दस्तावेजों की जांच को और सख्त कर सकती है। हालांकि, इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
पुलिस का मुख्य उद्देश्य बालू के वास्तविक स्रोत की पहचान करना और फर्जी अथवा संदिग्ध दस्तावेजों के जरिए होने वाले संभावित अवैध परिवहन पर रोक लगाना बताया जा रहा है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा

