अब क्राइम सीन पर ही जुटेंगे वैज्ञानिक सबूत, एडीपीसी को मिली हाईटेक मोबाइल फॉरेंसिक वैन
पश्चिम बर्दवान, 27 अगस्त (हि. स.)। अपराध की जांच को और अधिक वैज्ञानिक, तेज और प्रभावी बनाने की दिशा में आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट (एडीपीसी) को बड़ी सुविधा मिली है। एडीपीसी को अत्याधुनिक मोबाइल फॉरेंसिक वैन उपलब्ध कराई गई है। अब यह वैन सीधे अपराध स्थल पर पहुंचकर वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य जुटाने और उन्हें सुरक्षित रखने में पुलिस की मदद करेगी।
गुरुवार को पुलिस कमिश्नर डॉ. प्रणव कुमार ने हरी झंडी दिखाकर इस विशेष मोबाइल फॉरेंसिक वैन को रवाना किया। इस अवसर पर एडीपीसी के कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी तथा विभिन्न थानों के आईसी और ओसी मौजूद रहे। अधिकारियों को वैन की सुविधाओं और अपराध स्थल से वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य एकत्र करने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गई।
अब तक किसी घटना के बाद महत्वपूर्ण साक्ष्यों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजना पड़ता था, जिससे प्रक्रिया में समय लगता था। नई मोबाइल फॉरेंसिक वैन के जरिए अपराध स्थल पर ही कई तरह की प्राथमिक जांच और साक्ष्य संग्रह का काम किया जा सकेगा।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इससे घटनास्थल से मिले महत्वपूर्ण सबूतों को वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित रखने में भी मदद मिलेगी। साथ ही साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की आशंका को कम किया जा सकेगा। यह मोबाइल फॉरेंसिक वैन आधुनिक उपकरणों से लैस है। इसमें कुल 14 प्रकार की विशेष फॉरेंसिक किट मौजूद हैं। इनमें जनरल एविडेंस कलेक्शन किट, डीएनए सैंपल कलेक्शन किट, ब्लड टेस्टिंग किट सहित कई अन्य वैज्ञानिक उपकरण शामिल हैं।
इन उपकरणों की मदद से अपराध स्थल से मिलने वाले विभिन्न प्रकार के साक्ष्यों को मौके पर ही व्यवस्थित तरीके से एकत्र कर सुरक्षित किया जा सकेगा। मोबाइल फॉरेंसिक वैन के आने से एडीपीसी में एविडेंस-बेस्ड इन्वेस्टिगेशन को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। अपराध की जांच में वैज्ञानिक साक्ष्यों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में घटनास्थल पर ही फॉरेंसिक विशेषज्ञता और उपकरण उपलब्ध होने से जांच अधिकारियों को काफी मदद मिलेगी।
एडीपीसी अधिकारियों का कहना है कि इस सुविधा से अपराध अनुसंधान में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा। वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर जांच को अधिक मजबूत और प्रभावी बनाने में यह मोबाइल फॉरेंसिक वैन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा

