आत्मतुष्टि छोड़ें, कार्यकर्ता लोगों तक संदेश पहुंचाएं : अभिषेक
कोलकाता, 02 मार्च (हि. स.)। सोमवार नज़रुल मंच से तृणमूल कांग्रेस के अखिल भारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने ‘तफशिलियों का संवाद’ कार्यक्रम में पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को आगामी राजनीतिक रणनीति को लेकर स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की आत्मतुष्टि पार्टी के लिए घातक हो सकती है। जीत या लोकप्रियता के भरोसे बैठने के बजाय कार्यकर्ताओं को ज़मीनी स्तर पर सक्रिय रहना होगा और घर-घर जाकर लोगों से संपर्क बढ़ाना होगा। विशेष रूप से राज्य की 84 अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति बहुल विधानसभा सीटों पर फोकस करने का निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में संगठन को और मजबूत करना समय की मांग है।
उन्होंने अगले 60 दिनों तक विशेष अभियान चलाने का आह्वान किया। इस अभियान के तहत कार्यकर्ताओं को भाजपा शासित राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में दलितों और आदिवासियों पर कथित अत्याचार और भेदभाव के मामलों की जानकारी लोगों तक पहुंचाने को कहा।
उनका कहना था कि जिन लोगों ने पिछले चुनाव में भाजपा को वोट दिया था, उन्हें तथ्यों के आधार पर समझाना होगा कि उनकी नीतियां तफशिली समाज के हित में नहीं हैं। भ्रम दूर करना और वास्तविकता सामने लाना ही इस अभियान का उद्देश्य होगा।
राज्य और केंद्र की नीतियों की तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि जहां ममता बनर्जी के नेतृत्व में राज्य सरकार ‘लक्ष्मी भंडार’ और ‘युवासाथी’ जैसी योजनाओं के माध्यम से सीधे लोगों के बैंक खातों में आर्थिक सहायता पहुंचा रही है, वहीं केंद्र सरकार ‘विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण’ (एसआईआर) जैसी प्रक्रियाओं के नाम पर लोगों के अधिकार सीमित करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस की सरकार जरूरतमंदों को लाभ देने का काम कर रही है, जबकि भाजपा लोगों को कतारों में खड़ा कर उनका नाम सूची से हटाने की राजनीति करती है।
केंद्र सरकार को खुली चुनौती देते हुए उन्होंने कहा कि यदि यह प्रमाणित कर दिया जाए कि पिछले पांच वर्षों में बंगाल के लोगों के अधिकारों के लिए केंद्र ने दस पैसे भी अतिरिक्त दिए हैं, तो वह उसी क्षण राजनीति छोड़ देंगे। इस बयान के साथ उन्होंने राज्य के बकाया मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा के 100 दिन के काम और आवास योजना की बकाया राशि को रोका गया है, जिससे गरीब और तफशिली समाज के लोग प्रभावित हो रहे हैं।
अपने संबोधन में उन्होंने ‘बाहरी बनाम स्थानीय’ मुद्दे को भी रेखांकित किया। उनका कहना था कि बंगाल की संस्कृति, अस्मिता और तफशिली समाज की सुरक्षा केवल तृणमूल कांग्रेस ही कर सकती है। दिल्ली से संचालित राजनीति बंगाल की संवेदनाओं और सामाजिक संरचना को नहीं समझ सकती।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे संगठित होकर जनता के बीच जायें, सरकार की योजनाओं की जानकारी दें और विपक्ष के आरोपों का तथ्यों के साथ जवाब दें।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता

