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विधानसभा हस्ताक्षर जालसाजी मामले में अभिषेक बनर्जी को राहत, कलकत्ता हाई कोर्ट ने अंतरिम संरक्षण एक माह बढ़ाया

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विधानसभा हस्ताक्षर जालसाजी मामले में अभिषेक बनर्जी को राहत, कलकत्ता हाई कोर्ट ने अंतरिम संरक्षण एक माह बढ़ाया


कोलकाता, 17 जुलाई (हि.स.)। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी को विधानसभा हस्ताक्षर जालसाजी मामले में बड़ी राहत मिली है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने उन्हें पहले से मिली अंतरिम सुरक्षा (रक्षाकवच) की अवधि एक महीने के लिए बढ़ा दी है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया है कि उन्हें जांच एजेंसी के साथ पूरा सहयोग करना होगा।

यह मामला उस पत्र से जुड़ा है, जिसमें तृणमूल कांग्रेस की ओर से विधानसभा अध्यक्ष को शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता चुनने की जानकारी दी गई थी। आरोप है कि उस पत्र पर कुछ विधायकों के हस्ताक्षरों में कथित तौर पर हेरफेर किया गया। पत्र पर पार्टी के महासचिव के रूप में अभिषेक बनर्जी के हस्ताक्षर भी थे। इसी आधार पर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। बाद में मामले की जांच राज्य की अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी) को सौंप दी गई। जांच के दौरान सीआईडी ने अभिषेक से कई बार पूछताछ भी की है।

इस मामले में सीआईडी के नोटिस को चुनौती देते हुए अभिषेक बनर्जी ने हाई कोर्ट का रुख किया था। अदालत ने पहले उन्हें सशर्त अंतरिम संरक्षण दिया था, जिसकी अवधि इस महीने समाप्त होने वाली थी। शुक्रवार को न्यायमूर्ति कौशिक चंद की पीठ में मामले की सुनवाई हुई। अदालत ने अंतरिम संरक्षण की अवधि एक माह के लिए बढ़ा दी, लेकिन यह भी निर्देश दिया कि अभिषेक जांच में हर स्तर पर सहयोग करेंगे।

इसी मामले में अभिषेक बनर्जी ने सीआईडी के नोटिस के साथ-साथ प्राथमिकी रद्द करने की मांग करते हुए अलग याचिका भी दायर की है। गुरुवार को हाई कोर्ट ने इस याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी कर उसका पक्ष मांगा था। इस मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित है। ऐसे में अंतरिम संरक्षण की अवधि बढ़ने से अभिषेक को फिलहाल राहत मिली है।

विवाद की शुरुआत तब हुई थी, जब तृणमूल के ही निर्वाचित विधायक ऋतव्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने विधानसभा अध्यक्ष को भेजे गए पत्र में हस्ताक्षरों से छेड़छाड़ का आरोप लगाया। इसके बाद विधानसभा की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। बाद में ऋतव्रत के नेतृत्व वाले विधायकों ने अलग पत्र सौंपा, जिसके आधार पर उन्हें विपक्ष का नेता घोषित किया गया। इस निर्णय को चुनौती देते हुए शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने भी हाई कोर्ट में याचिका दायर की है, जिस पर सुनवाई जारी है।

उल्लेखनीय है कि विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के खराब प्रदर्शन के बाद पार्टी के भीतर राजनीतिक मतभेद बढ़े हैं। ऋतव्रत बनर्जी के नेतृत्व में कई निर्वाचित विधायक अलग गुट बना चुके हैं। पार्टी के संगठन, चुनाव चिह्न और कोष पर अधिकार को लेकर भी अदालत में अलग-अलग मामले लंबित हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर