32 लाख की लागत से बना पुल पांच साल में ही ध्वस्त, कालू नदी के दोनों किनारों के लोगों की बढ़ी परेशानी
दक्षिण 24 परगना, 20 सितंबर (हि. स.)। तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल में करीब 32 लाख की लागत से निर्मित कंक्रीट का पुल महज पांच साल के भीतर ही टूटकर ध्वस्त हो गया। घटना रविवार सुबह दक्षिण 24 परगना जिले के पाथरप्रतिमा ब्लॉक में हुई। कालू नदी पर बना यह करीब 100 मीटर लंबा पुल इलाके के लोगों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग था।
पुल के एक तरफ दक्षिण गंगाधरपुर ग्राम पंचायत के आबाद गंगाधरपुर गांव और दूसरी ओर श्रीनारायणपुर-पूर्णचंद्रपुर ग्राम पंचायत क्षेत्र के लोगों की आवाजाही होती थी। पुल के टूटने से नदी के दोनों किनारों के निवासी गंभीर आवागमन संकट में पड़ गए हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि करीब पांच वर्ष पहले पुल के निर्माण के दौरान ही निम्न गुणवत्ता वाली निर्माण सामग्री के इस्तेमाल की शिकायत सामने आई थी। कुछ समय बाद पुल में दरारें और क्षति दिखाई देने लगी। बाद में कुछ पतले लोहे के सरियों के सहारे पुल की मरम्मत कर दोबारा ढलाई कर किसी तरह इसे चालू किया गया था।
स्थानीय निवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाने और विरोध करने पर उन्हें डराने-धमकाने, मारपीट करने तथा झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दी गई थी।
रविवार तड़के पुल के दोबारा ढह जाने के बाद बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने पुल निर्माण में कथित तौर पर निम्न गुणवत्ता के काम की जांच कराने तथा इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। साथ ही प्रशासन से जल्द से जल्द नए पुल के निर्माण की मांग की गई है।
स्थानीय लोगों के स्कूल आने-जाने के अलावा गदामथुरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, रामगंगा बीडीओ कार्यालय समेत कई महत्वपूर्ण स्थानों तक पहुंचने के लिए लोग इसी मार्ग का इस्तेमाल करते थे। पुल टूटने के बाद सबसे ज्यादा परेशानी मरीजों, स्कूली छात्रों और आपातकालीन सेवाओं से जुड़े लोगों को हो रही है।
फिलहाल नदी पार करने के लिए स्थानीय लोगों के पास केले के तने से बनी अस्थायी नाव (मान्दास) ही प्रमुख सहारा रह गई है। रविवार को परिजन एक मरीज को भी मान्दास के जरिए नदी पार कराते नजर आए।
इस बीच सुंदरबन विषयक विकास विभाग के राज्य मंत्री दीपंकर जाना ने पुल की जल्द मरम्मत और पुनर्निर्माण का काम शुरू कराने का आश्वासन दिया है। मंत्री ने यह भी कहा कि पुल निर्माण के दौरान किसी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार हुआ था या नहीं, इसकी जांच की जाएगी। जांच में यदि कोई दोषी पाया जाता है, तो वह चाहे कोई भी हो, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय

