हुगली : तृणमूल ने छह विधायकों को नहीं दिया टिकट
सुदीप्तो, रत्ना, तपन, असित जैसे वरिष्ठ विधायकों को भी नहीं मिला टिकट
हुगली, 18 मार्च (हि. स.)। तृणमूल कांग्रेस ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की सूची में बड़े बदलाव करते हुए हुगली जिले के छह विधायकों को इस बार टिकट नहीं दिया है। इनमें श्रीरामपुर के चार बार के विधायक सुदीप्त रॉय का नाम प्रमुख है।
एक समय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले सुदीप्त रॉय को उम्मीदवार न बनाए जाने से राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। उनकी जगह श्रीरामपुर सीट से पार्टी प्रवक्ता तन्मय घोष को उम्मीदवार बनाया गया है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, सुदीप्त रॉय को उम्र और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए टिकट नहीं दिया गया। इस बारे में उन्होंने कहा कि पार्टी के फैसले से उन्हें कोई शिकायत नहीं है और वह हमेशा की तरह पार्टी के प्रति समर्पित रहेंगे।
हुगली जिले में अन्य कई वरिष्ठ नेताओं के भी टिकट काटे गए हैं। इनमें सप्तग्राम के विधायक तपन दासगुप्ता, चुचुड़ा के असित मजूमदार, पांडुआ की रत्ना दे नाग, बलागढ़ के मनोरंजन व्यापारी और उत्तरपाड़ा के कंचन मलिक शामिल हैं।
सप्तग्राम में तपन दासगुप्ता की जगह फुटबॉलर विदेश बोस को उम्मीदवार बनाया गया है, जबकि चुचुड़ा से युवा नेता देवांशु भट्टाचार्य को टिकट मिला है। असित मजूमदार ने इसे पार्टी का फैसला बताते हुए कहा कि युवा नेतृत्व को मौका देना जरूरी है और उन्होंने राजनीति से संन्यास लेने का संकेत भी दिया।
उत्तरपाड़ा से इस बार शीर्षान्य बनर्जी को उम्मीदवार बनाया गया है, जो सांसद कल्याण बनर्जी के पुत्र हैं। वहीं बलागढ़ में मनोरंजन व्यापारी की जगह रंजन धारा को टिकट दिया गया है।
पांडुआ सीट से भी रत्ना दे नाग को इस बार टिकट नहीं दिया गया और उनकी जगह समीर चक्रवर्ती को उम्मीदवार बनाया गया है। रत्ना ने पार्टी के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि वह घोषित उम्मीदवार के लिए प्रचार करेंगी।
हालांकि पार्टी ने कुछ मौजूदा विधायकों पर भरोसा बरकरार रखा है, जिनमें जंगीपाड़ा से स्नेहाशीष चक्रवर्ती, चंडीतला से स्वाति खंदकार, सिंगूर से बेचाराम मन्ना, हरिपाल से करबी मन्ना, चंदननगर से इंद्रनील सेन और चांपदानी विधायक अरिंदम गुईन शामिल हैं।
पार्टी के इस फैसले को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि तृणमूल इस बार रणनीति के साथ चुनाव मैदान में उतर रही है। हालांकि कुछ विश्लेषकों का यह भी कहना है कि तृणमूल कांग्रेस का यह फैसला हुगली जिले में पार्टी के नाव को डुबा सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय

